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Maharajganj News: जुलूस में डीजे का शोर...दिल और कान के रोगियों की मुसीबत

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डीजे पर नाचते लोग।
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महराजगंज। दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद लक्ष्मी प्रतिमाओं के विसर्जन में बजने वाले डीजे के शोर ने लोगों को परेशान कर दिया है। सबसे अधिक दिक्कत हार्ट और कान के रोगियों को हो रही है। लोगों के हृदय की बढ़ने के साथ ही कानफोड़ू डीजे के शोर से कान सुन्न हो जा रहा था। लोगों का घरों के अंदर रहना तक मुश्किल हो गया है।
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों को विसर्जन जुलूस में डीजे का तेज लोगों को परेशान करता रहा। बृहस्पतिवार शाम को जुलूस के दौरान कार से गुजर रहे धीरेंद्र सिंह कहा कि आस्था का सवाल है। कहना भी ठीक नहीं लगता है लेकिन यह जटील समस्या है। कार के अंदर शीशा बंद होने के बाद भी कानफोड़ू शोर से मुश्किल हो रही। बीते दिन शहर में मां लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा विसर्जन के लिए शाम को ट्राॅली से ले जाई जा रही थी। सड़क से गुजरने के दौरान आस-पास के घरों में रहने वाले लोग कुछ देर के लिए परेशान रहे। गाइड लाइन के अनुसार, 45 डेसिबल से ज्यादा डीजे नहीं बजाया जा सकता है लेकिन संचालक 200 डेसिबल तक डीजे बजा रहे हैं। इसके शोर से कान की समस्या उत्पन्न हो रही है। जागरूक लोगों के मुताबिक, शोर-शराबा थोड़ा संयमित होना चाहिए, जिससे बुजुर्ग, बच्चों और बीमारों की सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े। लेकन, भक्ति के जोश में होश खोए युवाओं को इसकी परवाह कहां। डीजे की फुल म्यूजिक ही तो उनके आनंद का प्रमुख कारण है। नाचना, उछलना, करतब दिखाने का सिलसिला विसर्जन के दौरान रास्ते भर चला।
हृदय के मरीजों को नींद न आने से उनकी बीपी अनियंत्रित हो जाती -केएमसी मेडिकल काॅलेज एंड हास्पिटल के सीईओ डॉ. एसएम रफीक ने बताया कि हृदय रोग से संबंधित मरीजों के लिए तेज आवाज नुकसानदेह हो सकता है। तेज आवाज से मरीजों की धड़कनें तेज चलने लगती हैं। हृदय के मरीजों को नींद न आने से उनकी बीपी अनियंत्रित हो जाती है जिससे उनकी दिक्कतें बढ़ जाती है। आमतौर पर हृदय के मरीजों का वाल्व खराब हो जाता है और तेज आवाज के कारण उनकी धड़कनें बढ़ जाती हैं।
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