दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 152 था, अब 170 पर पहुंच गया
सुबह छाई रहती है घनी धुंध, सांस लेने में होती है दिक्कत, आंख में होती है जलन
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल की तराई में होने और वन क्षेत्र की अधिकता की वजह से जिले में वायु प्रदूषण का उतना असर तो नहीं है, लेकिन दिवाली में जलाए गए लाखों रुपयों के पटाखों ने हवा की गुणवत्ता काफी खराब कर दी है। पराली जलाने से भी वायु प्रदूषण में इजाफा हुआ है। स्थिति यह है कि वातावरण में सुबह स्मॉग की सफेद चादर छा जाने से सैर करने वालों को दिक्कत हो रही है। डॉक्टर भी इस वक्त टहलने से मना कर रहे हैं। कई लोगों ने सुबह टहलने का वक्त बदल लिया है।
शहर में दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता का सूचकांक (एक्यूआई) 152 था। जोकि मंगलवार को बढ़कर 168 हो गया था। बुधवार को इसमें और वृद्धि हुई तो यह बढ़कर 170 पर पहुंच गया। यह स्तर गंभीर तो नहीं, लेकिन खराब की श्रेणी में आता है। इस स्तर को भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया जाता है। हवा की गुणवत्ता खराब होने पर सुबह टहलने वाले लोगों को घुटन जैसी हो रही है। कई लोगाें को आंखों में जलन की शिकायत भी है।
बुधवार सुबह छह बजे शहर के फरेंदा रोड से होकर आगे बढ़ने पर महुआ चौराहे से घनी धुंध दिख रही थी। इस तरह की तस्वीर शहर के अन्य हिस्सों में भी थी। चिऊरहा की ओर से आगे जाने पर टूटी सड़क से गुजरते वाहनों की धूल से धुंध ज्यादा घनी हो गई थी। स्थिति यह थी कि सामने के मकान नहीं दिख रहे थे। सुबह भ्रमण करने वालों को इस धुंध से परेशानी हुई। लोगों का कहना है कि ऐसा नजारा दिवाली के बाद से दिख रहा है। सुबह टहलने के दौरान लोग आपस में इस मसले पर बातचीत करते हैं।
राममनोहर लोहिया पार्क में योगाभ्यास कर रहे सत्यम ने बताया कि सुबह धुंध व धूल से समस्या हो रही है। सड़क से गुजरने पर जब कोई भारी वाहन गुजरता है तो नाक पर रूमाल रख कर आगे बढ़ना पड़ता है।
डॉ. शांतिशरण मिश्र कहते हैं कि सुबह टहलने की आदत है, मगर स्मॉग के कारण समस्या हो रही है। बड़े शहरों की अपेक्षा अपने शहर की हवा काफी ठीक है। एक्यूआई का बढ़ना चिंता का विषय है, इस पर विचार करने की जरूरत है।
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भोर में टहलने पर पर समस्या हो रही है। दिवाली से पहले इस तरह की दिक्कत नहीं होती थी। पटाखों की वजह से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होने से दिक्कत हो रही हे। अब टहलने के समय में बदलाव कर दिया हूं।
-राकेश पांडेय, शास्त्री नगर
सुबह धुंध सी छाई रहती है। यह वायु प्रदूषण का असर है। शहर की हवा खराब होना सेहत के लिए नुकसानदायक है। बीमार लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। सात बजे के बाद जब धुंध कम होती है। तभी टहलने निकलें। लोगों को गाड़ी का प्रयोग कम करने की जरूरत है।
-बैजनाथ सिंह, चिऊरहा
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अगर ऐसे ही हवा खराब होती रही तो सुबह की हवा लाख रुपये की दवा नहीं रह जाएगी। ऐसी हवा में टहलने पर लोग बीमारी की चपेट में आएंगे। ज्यादा सुबह टहलने पर आंखों में जलन जैसी दिक्कत हो जाती है।
- बलराम निगम, मऊपाकड़
सुबह नियमित टहलता हूं। इधर कुछ कम कर दिया हूं। स्माॅग होने के कारण दिक्कत हो रही है। दिवाली के बाद से थोड़ी समस्या बढ़ गई है। शहर में हवा का स्तर ज्यादा खराब नहीं है, लेकिन समस्या उत्पन्न करने के लिए काफी है।
- त्रिभुवन वर्मा, पड़री
एक्यूआई एक नजर में
0-50 अच्छी,
51-100 संतोषजनक,
101-200 मध्यम,
201-300 खराब,
301-400 बहुत खराब
401 से 500 गंभीर
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पटाखे जलाने से हवा में 2.5 पीएम कई गुना बढ़ जाता है
प्रधानाचार्य डॉ. हरेंद्र यादव ने बताया कि पटाखों को जलाने से हवा में 2.5 पीएम का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। यह हवा में मौजूद बहुत छोटे कण होते हैं। छोटे कण होने के कारण सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। इस कारण सांस लेने में समस्या, कफ और आंख में जलन महसूस होती है। पटाखे ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। पटाखों को बनाने में बारूद का इस्तेमाल होता है, जोकि पोटैशियम नाइट्रेट, चारकोल और सल्फर से मिलकर बनता है। इसे जब एक सेल में रखकर आग लगाई जाती है, तो इनके रिएक्शन से धमाका होता है।
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पटाखों के फूटने पर अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं
प्रवक्ता जीव विज्ञान अमरेंद्र शर्मा ने बताया कि पटाखों में कुछ खास तरह के मिनरल एलिमेंट का भी उपयोग किया जाता है, इस वजह से पटाखों के फूटने पर अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं। इसमें बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके चलते हरा रंग देखने को मिलता है। एल्युमीनियम सफेद रंग के लिए, स्ट्रॉन्टियम लाल रंग और कॉपर नीले रंग के लिए। इन सभी कंपाउंड को साथ रखने के लिए बाइंडर्स को उपयोग में लाया जाता है। यह सभी प्रदूषण के लिए हानिकारक होते हैं।
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दिवाली पर एक करोड़ से अधिक का बिका पटाखा
हर बार की तुलना में इस बार दिवाली पर खूब पटाखा बिका। लोगों ने महंगा होने के बावजूद जमकर खरीदारी की। अनुमान है कि 48 घंटे में करीब एक करोड़ से अधिक कीमत का पटाखा बिका। पटाखा की दुकान लगाने वाले रमेश जायसवाल बताते हैं कि लोगों ने दिवाली के साथ ही छठ के लिए भी पटाखों की खरीदारी की है।