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Maharajganj News: पांच साल से वैकल्पिक बिजली पर जिला अस्पताल, कटौती से जांच प्रभावित

Fri, 25 Sep 2026 02:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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- एनएच-730 निर्माण के दौरान कटी मुख्य लाइन अब तक नहीं जुड़ी, जनरेटर के सहारे जरूरी सेवाएं
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- सितंबर में कई बार बाधित हुई आपूर्ति
महराजगंज। एनएच-730 के निर्माण के दौरान करीब पांच साल पहले जिला अस्पताल की मुख्य बिजली लाइन कट गई लेकिन अब तक इसे दोबारा नहीं जोड़ा जा सका है। फिलहाल अस्पताल की आपूर्ति मुख्यालय फीडर से हो रही है। इस फीडर में फाल्ट या तकनीकी खराबी आते ही अस्पताल की बिजली भी बंद हो जाती है। जनरेटर से पूरे परिसर को आपूर्ति देना संभव नहीं होने से लो वोल्टेज की समस्या आने लगती है। इसके चलते मशीनों से जांच करना मुश्किल हो जाता है और 10 में से करीब पांच एसी बंद करने पड़ते हैं।

पहले अस्पताल को बैकुंठपुर उपकेंद्र से अलग लाइन मिलती थी। इससे आसपास के क्षेत्र में खराबी आने पर भी अस्पताल की आपूर्ति सुरक्षित रहती थी। सड़क निर्माण के दौरान मुख्य लाइन कटने के बाद अस्पताल प्रशासन ने बिजली निगम को पत्र भेजकर इसे बहाल करने की मांग की थी। स्थायी समाधान नहीं होने पर अस्पताल के पास स्थित मुख्यालय फीडर से वैकल्पिक कनेक्शन कर दिया गया।
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सितंबर में कई बार गुल हुई बिजली

सितंबर में आपूर्ति कई बार बाधित हुई। एक सितंबर को करीब डेढ़ घंटे, तीन सितंबर को तीन घंटे, सात सितंबर को आधे घंटे और नौ सितंबर को साढ़े तीन घंटे बिजली बंद रही। 10 सितंबर को दो घंटे 15 मिनट, 13 सितंबर को चार घंटे तथा 20 सितंबर को करीब चार घंटे 15 मिनट तक आपूर्ति प्रभावित हुई। इससे अस्पताल की नियमित सेवाओं पर असर पड़ा।



डायलिसिस, सीटी स्कैन और एक्स-रे पर असर

बिजली बाधित होने पर डायलिसिस, सीटी स्कैन और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं को जनरेटर से चलाना पड़ता है। लंबे समय तक बैकअप चलाने से ईंधन की खपत भी बढ़ती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार 24 घंटे जनरेटर चलाने पर करीब एक हजार लीटर डीजल की जरूरत पड़ सकती है।



24 घंटे जनरेटर चला तो चाहिए करीब एक हजार लीटर डीजल

बिजली कटौती के दौरान अस्पताल की निर्भरता जनरेटर पर बढ़ जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार 24 घंटे लगातार जनरेटर चलाने की स्थिति में करीब एक हजार लीटर डीजल की जरूरत पड़ सकती है। लंबे समय तक बिजली बाधित रहने पर ईंधन की खपत और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। ऐसे में अस्पताल के लिए अलग और निर्बाध बिजली आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
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मुख्य लाइन से संबंधित पुरानी पत्रावलियां देखी जाएंगी। इसके बाद बिजली निगम के अधिकारियों से वार्ता कर लाइन दोबारा जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. एके द्विवेदी, सीएमएस, जिला अस्पताल
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