लाठी के सहारे चलते हैं दिव्यांग अर्जुन, विद्युत निगम ने दौड़ लगाने को कर दिया मजबूर
जिम्मेदारों ने शौचालय में बिना कनेक्शन लगा दिया है बिजली का मीटर, 36 हजार रुपये का थमाया दिया है बिल
- नहीं हुई है अर्जुन की शादी, अकेले जीते हैं जिंदगी, रात को बैट्री चालित लाइट जला बनाते हैं खाना
दिनेश चंद पांडेय
घुघली। ये हैं अर्जुन। एक पैर से दिव्यांग हैं। लाठी के सहारे चलते-फिरते हैं। दिव्यांग होने की वजह से शादी नहीं हुई। अकेले रहते हैं। एक भाई है, जिसकी शादी हो चुकी है। भाई का परिवार अलग रहता है। वैसे उनके दिल में भाई का प्यार जिंदा है। दिव्यांग अर्जुन के लिए भोजन भाई के घर से ही आता है, लेकिन कई बार उन्हें अपना खाना खुद ही बनाना पड़ता है। अकेलेपन और दिव्यांगता की मार के बावजूद अर्जुन अपनी जिंदगी की गाड़ी बढ़े हौसले से खींच रहे हैं। वे अपनी जीविका चलाने के लिए गांव से लगभग एक किमी दूर भुवनी चौराहे पर पान की दुकान करते हैं। वहां तक रोज लाठी के सहारे धीरे-धीरे चलते हुए पहुंचते हैं और देर शाम को घर लौटते हैं, लेकिन बिजली निगम के साहबों ने उन्हें एक दफ्तर से दूसरे के बीच दौड़ लगाने को मजबूर कर दिया है।
यह कहानी है भुवनी गांव के चुवनी टोला के 32 वर्षीय दिव्यांग अर्जुन की। उन्होंने बताया कि उनके घर में बिजली का कनेक्शन नहीं है, लेकिन 36 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया है। वे रात को बैटरी चालित लाइट जलाकर काम चलाते हैं। समस्या के समाधान के लिए विद्युत निगम के कर्मचारियों से अधिकारियों तक के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। आश्वासन सबने दिया, लेकिन समाधान किसी ने नहीं किया। अर्जुन ने बताया कि वर्ष 2014 में ग्राम सभा राम मनोहर लोहिया योजना में चयन उनका हुआ था। तब सरकारी योजना के तहत शौचालय का निर्माण हुआ था। उस समय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत लोगों के घर में बिजली का कनेक्शन लग रहा था। अभियान के तहत जिम्मेदारों ने कोरम पूर्ति के लिए बगैर कनेक्शन दिए ही उनके शौचालय में मीटर लगा दिया। कुछ दिन बाद से बिल का बिल भी निकालने लगे, जबकि मीटर में कनेक्शन ही नहीं है। कुछ दिनों तो उन्होंने इंतजार किया, लेकिन जब बिल आना जारी रहा तो कार्यालयों का चक्कर लगाना शुरू किया। जब समस्य का समाधान नहीं हुआ तो थक हार कर बैठ गया। अर्जुन ने बताया कि समस्या के समाधान का उन्हें हर किसी ने बस आश्वासन दिया। अर्जुन की समस्या के समाधान के लिए पूर्व प्रधान वकील उपाध्याय ने भी अधिकारियों से बात की, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला। संवाद
कोट--
- दिव्यांग अर्जुन प्रार्थना पत्र में पूरी बात लिखते हुए समस्या से अवगत कराए तो प्राथमिकता के आधार पर उसकी परेशानी दूर करा दी जाएगी। - हरिशंकर प्रसाद, एक्सईएन