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दिनेश की गिरफ्तारी से खुलेगा डिजिटल सिग्नेचर केे दुरुपयोग का राज

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दिनेश की गिरफ्तारी से खुलेगा डिजिटल सिग्नेचर केे दुरुपयोग का राज
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महराजगंज। मनरेगा प्रकरण में जिले में अब तक सामने आए लगभग डेढ़ करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले के बाद जिम्मेदारों में खलबली मची हुई है। भ्रष्टाचार के मुख्य सूत्रधार बताए जा रहे आरोपी एपीओ समेत दो को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया है, वहीं अन्य आरोपियों की तलाश में भी जुटी हुई है।
माना जा रहा है कि परतावल व घुघली दोनों ही ब्लॉकों में हुए भ्रष्टाचार में शामिल दूसरे आरोपी दिनेश मौर्य की गिरफ्तारी के बाद ही वन विभाग के डिजीटल सिग्नेचर के दुरुपयोग तथा भ्रष्टाचार की जड़ों का पता चल सकेगा। मनरेगा योजना के तहत पहले परतावल ब्लॉक के बरियरहवा पोखरी के सुंदरीकरण के नाम पर 2587920 रुपये का फर्जी भुगतान कराने तथा बाद में घुघली के विभिन्न ग्राम पंचायतों में सात कार्यों के नाम पर लगभग 80 करोड़ का भुगतान कराने के मामले में गिरफ्तार हुए एपीओ विनय मौर्य के साथ जो दूसरा नाम सामने आया, वह कथित ठेकेदार दिनेश मौर्या का है। दोनों ही ब्लॉकों में उनका नाम सामने आना यह दर्शाता है कि उनकी मामले में संलिप्तता है।
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आरोपी एपीओ की गिरफ्तारी के बाद जिस शख्स की पुलिस को सरगर्मी से तलाश है, वह दिनेश ही है। जिम्मेदारों का मानना है कि यदि दिनेश पुलिस के हाथ लग जाएगा तो मामले से जुड़ी अहम एवं चौंकाने वाली जानकारी सामने आएगी। परियोजना निदेशक राज करन पाल ने बताया कि मनरेगा प्रकरण मेें आरोपी दिनेश की भूमिका भी काफी गड़बड़ है। उसके पकड़े जाने के बाद डिजीटल सिग्नेचर के दुरुपयोग आदि की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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भ्रष्टाचार मामले में दोषियों से होगी धन की वसूली
परियोजना निदेशक ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामले में जो भी आरोपी होंगे उनसे गबन किए गए धनराशि की बराबर भागों में वसूली की जाएगी। धन जमा न करने की दशा में कुर्की समेत अन्य सभी प्रकार के विकल्पों पर भी विचार होगा।
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