फरेंदा। कम्हरिया खुर्द में स्थित काली मंदिर पर श्री हनुमंत महायज्ञ का आयोजन जारी है। यहां मथुरा वृदावन के कलाकारों ने कृष्ण-रुक्मणी विवाह का मंचन किया। इस दौरान विवाह की मनोहारी झांकी निकाली।
रासलीला में कलाकारों ने दिखाया कि कुंडिन नरेश भीष्मक की पुत्री का नाम रुक्मणी था। रुकमणी ने देवर्षि नारद एवं अन्य लोगों के मुख से भगवान के सौंदर्य, माधुर्य आदि गुणों को सुनकर अपना प्राण श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया था। लेकिन रुकमणी के पांच भाई श्री कृष्ण से विवाह नहीं करवाना चाहते थे। ऐसी स्थिति में उन्होंने रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से संपन्न कराने की योजना बनाई।
रुकमणी को जब यह बात ज्ञात हुई तो उन्होंने एक ब्राह्मण के हाथ से पत्र लिखकर भिजवा दिया और अपनी समस्या से अवगत करा दिया। पत्र मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण कुंडिनपुर आए और कात्यायनी देवी के मंदिर पर उनको अपने रथ पर बैठा कर द्वारका के लिए रवाना हो गए। इस दौरान यजमान सुनील पांडेय, सत्यभामा पांडेय, अध्यक्ष बंटी पांडेय, जसवंत पांडेय, भोला, बैजनाथ, विनोद, दुखहरन, पप्पु, पारले, राजन, विवेक मौजूद रहे।