महराजगंज। जिला कारागार में सजायाफ्ता बंदियों को अवसाद से बाहर निकालने में जेल प्रशासन के साथ स्वास्थ्य महकमा विशेष जिम्मेदारी निभा रहा है। मनोरोग से ग्रसित बंदियों को सीबीटी (संज्ञानात्मक व्यवहार) व एमबीसीटी (माइंडफुलनेस आधारित) थेरेपी दी जा रही है।
जिसकी मदद से वह मानसिक अवसाद से न सिर्फ बाहर निकल रहे हैं, बल्कि सभ्य समाज के साथ सामंजस्य भी बिठा रहे हैं।
इस प्रक्रिया से जिला कारागार के 9 बंदियों को लाभ मिला है, जबकि 13 की थेरेपी अभी चल रही है। महराजगंज जिला कारागार में मौजूदा समय में 779 बंदी निरुद्ध हैं। इसमें 296 बंदी ऐसे हैं जिन्हें न्यायालय से सजा दी जा चुकी है। अपराध और सजा निर्धारण के बाद तमाम बंदी ऐसे होते हैं जो अवसाद में चले जाते हैं। उनका व्यवहार चिड़चिड़ा होने के साथ अन्य बदलाव प्रभावी होने लगते हैं।
इन पर नियंत्रण रखने में जेल प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है क्योंकि इन पर नकारात्मक विचार इतने प्रभावी हो जाते हैं कि कभी-कभी यह आदेश की अवहेलना तक कर बैठते हैं, लेकिन जेल प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग ने इसपर नियंत्रण प्राप्त करने में मदद मिली है।
चार माह में 9 कैदी हुए सामान्य : जिला कारागार की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए डाॅ. श्याम को चार माह पहले सीएमओ ने तैनाती दी। इससे पहले वह सदर सीएचसी में थे। उन्होंने दायित्व लेने के बाद अवसाद और मनोरोग से जूझ रहे कैदियों को करीब से देखा। किसी को अपराध का अवसाद था तो किसी को सजा मिलने पर।
कुछ ऐसे भी थे जो नशे के लती हो चुके थे। समस्या को देखते हुए उन्होंने डाॅ. सुभांबुज जो जिला अस्पताल में तैनात हैं उनसे संपर्क कर सीबीटी और एमबीसीटी थेरेपी जिला जेल में जनवरी 2025 से प्रारंभ कराई। प्रयोग सफल रहा और 9 कैदी अवसाद से पूरी तरह बाहर निकल सके हैं। डाॅ. श्याम ने बताया कि मनोरोग की इस थेरेपी के डाॅ. शुभांबुज जानकार हैं। उनकी मदद से हर सप्ताह कारागार में एक घंटे कार्यक्रम मनोरोग से जूझ रहे बंदियों के लिए किया जाता है।
इसमें सकारात्मक भाव, विचार, भावनाओं की अभिव्यक्ति इत्यादि पर कार्य होने के साथ योग का सहारा भी लिया जाता है। 9 बंदी दो माह में इससे लाभांवित हुए और 13 अवसाद से उबरने के लिए नियमित थेरेपी ले रहे हैं।