महराजगंज। दुर्गा महोत्सव संपन्न हुआ तो लक्ष्मी महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजन के लिए सक्रिय समितियां पंडाल से लेकर साजसज्जा और मूर्तियों के प्रबंध के साथ डीजे का इंतजाम करना नहीं भूल रही हैं। डीजे की अनिवार्यता के बीच समितियों का ध्यान इस तरफ नहीं पहुंचता कि डीजे की आवाज आसपास के लोगों के लिए खतरा न उत्पन्न कर दे। क्योंकि चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि तय मानक से अधिक डेसिबेल पर बजाए जा रहे डीजे न सिर्फ दिल की धड़कन पर प्रभाव डाल रही हैं, बल्कि नर्वस सिस्टम पर अटैक कर हार्ट अटैक तक के लिए जिम्मेदार हैं।
80 डेसिबल तक की ध्वनि सामान्य मानकर इतनी ध्वनि पर डीजे बजाया जा सकता है। लेकिन 120 से 150 डेसिबल में बज रहे डीजे सेहत का जोखिम बढ़ा रहे हैं। इस महीने लक्ष्मी महोत्सव, दीपोत्सव, करवाचौथ फिर छठ पूजन तक डीजे का शोर थमने वाला नहीं बल्कि सहालग शुरू होते ही एक डीजे की कौन कहे एक- एक मोहल्ले में कई -कई डीजे का शोर दिल के बीमार व बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ाएंगे। त्योहारों के मौसम के बाद शादी-ब्याह, पार्टियों में तेज आवाज में डीजे बजाने का चलन खतरनाक होता जा रहा है। जिला अस्पताल के ईएनटी डाॅ. अनिरुद्ध के मुताबिक 80 डेसीबल से तेज ध्वनि खतरनाक है। जो हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाती है। तेज आवाज वाला डीजे या बहुत हाई डेसिबल ध्वनि का संगीत केवल कानों पर असर नहीं डालता, बल्कि यह सीधे दिल की धड़कनों को भी प्रभावित करता है।