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Maharajganj News: पढ़ रहीं और आगे बढ़ रहीं बेटियां, अब कम बन रहीं बालिका वधू

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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की पिछली रिपोर्ट के अनुसार 54 प्रतिशत बेटियां जातीं थीं स्कूल, इस बार यह ग्राफ बढ़कर हुआ 62 प्रतिशत
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कम उम्र शादी का ग्राफ भी घट गया, वर्तमान में 24 प्रतिशत
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में बेटियां पढ़ रही हैं, बढ़ रही हैं। उनको सरकार की योजना का फायदा मिल रहा है। कम उम्र में शादी भी नहीं हो रही है। उनको आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट इस बात को तस्दीक कर रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4 की रिपोर्ट में बाल विवाह 48 प्रतिशत था, जो अब घटकर 24 प्रतिशत हो गया है। शिक्षा का स्तर भी पिछली रिपोर्ट में जहां 54 था, इस बार बढ़कर 62 प्रतिशत हो गया है।
जानकारी के अनुसार जिले की आबादी करीब 30 लाख है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे चार की रिपोर्ट में बेटियों का स्कूल जाने का ग्राफ 54 प्रतिशत रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ मिला तो बेटियों को आगे बढ़ने का मौका मिला। अभिभावकों ने भी जागरूकता दिखाई, इसका परिणाम यह रहा है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 में बेटियों को स्कूल जाने वाले ग्राफ में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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शहर के गांधी नगर के वीरेंद्र ने बताया कि बेटियों को अवसर मिल रहा है तो वह भी आगे बढ़कर नाम रोशन कर रहीं हैं। सरकार ने भी बेटियों के लिए कन्या सुमंगला योजना संचालित की है, इससे भी कुछ बदलाव हुआ है। लोगों के विचारों में भी बदलाव आ रहा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी डीसी त्रिपाठी ने बताया कि विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर बेटियों के हित की योजनाओं के बारे में जानकारी दी है। योजनाओं का बेहतर ढंग से लाभ दिया जा रहा है। इसका परिणाम है कि शिक्षा से लेकर सामाजिक जीवन में स्तर में भी सुधार हो रहा है।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
सुकन्या समृद्धि योजना

बालिका समृद्धि योजना

सीबीएसई उड़ान स्कीम

माध्यमिक शिक्षा के लिए लड़कियों के लिए प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना

धनलक्ष्मी योजना

राज्य सरकार बालिका योजनाएं

समाज में बेटियों के प्रति अनिच्छा और उन्हें गर्भ में ही मार देने की प्रवृत्ति के कारण गिरते लिंगानुपात को गंभीरता से लेते हुए 22 जनवरी 2015 को सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की थी। शुरुआत में यह योजना उन जिलों में लागू की गई जहां लड़कों की तुलना में लड़कियाें का अनुपात काफी कम था और गंभीर लिंगानुपात अंतर था। धीरे-धीरे योजना का दायरा बढ़ाया गया और इसका लाभ मिल रहा।
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डॉ. राणा प्रताप तिवारी, साहित्यकार



वर्तमान समय में बेटियां बिना किसी बाधा और सामाजिक बंधनों के उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहीं हैं। लोगों के विचारों में बदलाव आ रहा है। गुजरे वक्त की तुलना में वर्तमान समय में काफी बदलाव आया है। बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। शहरी क्षेत्रों में तो बालिकाओं की स्थिति सुधरने के साथ ही ग्रामीणों क्षेत्र में बेटियों की शिक्षा को लेकर काफी सुधार हो रहा है।

दीपा शर्मा, प्रधानाचार्य, द हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल
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