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दर्जिनियां ताल : पर्यटन के नाम पर शुल्क...सुविधाएं बदहाल

Sun, 09 Mar 2025 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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निचलौल। दर्जिनिया ताल पर पर्यटन सुविधाएं बदहाल हैं। यहां शुल्क तो लिया जाता है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। वॉच टावर टूट चुका है। बंबू हट भी बदहाल है। वहीं ताल की सफाई नहीं होने से मगरमच्छों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है।
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जानकारी के अनुसार, करीब छह माह से दर्जिनिया ताल पर पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में 55 फीसदी तक गिरावट आई है। छुट्टियों के दिन छोड़कर अन्य दिनों में यहां सन्नाटा देखने को मिल रहा है। ताल पर बदहाल व्यवस्था के बीच पर्यटकों और वाहनों पर लगने वाले शुल्क को बड़ी वजह माना जा रहा है। दर्जिनियां ताल पर वर्ष 2016 में वन विभाग ने करीब 14 लाख रुपये खर्च कर पर्यटन स्थल के रूप में शुरू किया था।
उस दौरान पर्यटकों को लुभाने के लिए वन विभाग की ओर से बगैर शुल्क के ताल पर प्रवेश दिया जाने लगा। इतना ही नहीं ताल पर पर्यटकों को मगरमच्छ देखने के लिए दूरबीन कैमरे, वाच टॉवर, बैठने, स्वच्छ पेयजल के अलावा अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं। करीब साल भर से बदहाल हो चुकी हैं। इतना ही नहीं बदहाल व्यवस्थाओं के बीच अब वन विभाग की ओर से ताल से करीब चार सौ मीटर पहले टेल फॉल नहर पर बैरियर लगा है। जहां पर दो वनकर्मियों को तैनात कर पर्यटन के नाम पर शुल्क वसूल करने के बाद प्रवेश दिया जा रहा है। जबकि पर्यटकों को लुभाने के लिए विभाग की ओर से ताल पर कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।
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प्रकृति प्रेमियों के लिए बना था दर्जिनिया ताल
मनमोहक वादियों के बीच स्थित दर्जिनिया ताल को पर्यटन स्थल बनाने का मुख्य उद्देश्य प्रकृति प्रेमियों को वन्यजीव प्रेमियों एवं पर्यटकों को वन संपदा की जैव विविधता, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर के महत्व के बारे में अधिक जानकारी देना था। इसके लिए जिम्मेदारों की ओर से शुरुआती पहल तो की गई, लेकिन बजट के अभाव में ताल पर होने वाली कई योजनाएं अधूरी रह गईं। यहां पर घने जंगलों के बीच चिड़ियों की चहचहाहट और नदी में घड़ियालों की उछल कूद के साथ ही ताल के बीच में बने टीलों पर मगरमच्छों की अठखेलियां की तस्वीर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती रहती है।
2.5 लाख खर्च कर बना था बंबू हॉट
दर्जीनियां ताल पर यात्रियों की भारी आवक को देखते हुए विभाग की ओर से ताल पर करीब ढाई वर्ष पहले 2.5 लाख रुपये की लागत से बंबू हॉट का निर्माण कराया गया था। इसे विभाग के जिम्मेदारों ने भुला दिया है। क्योंकि बनने के बाद आज तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बंबू हॉट जर्जर होकर दीमक की भेंट चढ़ रहा है।
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