महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्र में यूरिया की तस्करी को देखते हुए जिम्मेदारों ने सख्त कदम उठाया है। खाद ले जाने के दौरान टीम को खरीद रसीद नहीं मिली तो केस दर्ज करा दिया जाएगा। जांच के लिए एडीओ एजी, लेखपाल और पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है। इनके पर्यवेक्षण के लिए एसडीएम व सीओ तैनात रहेंगे। किसानों तक खाद पहुंचे, इसके लिए व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा रहा है। इन दिनों यूरिया के लिए किसानों को परेशानी हो रही है।
उर्वरक तस्करी रोकने के लिए विभाग ने मास्टर प्लान तैयार कर जिम्मेदारी तय कर दी है जिससे खाद की तस्करी न हो सके। साथ ही किसानों को इसके लिए परेशान न होना पड़े। जिले के भीतर कहीं भी कोई खाद लेकर आता जाता है तो उसे जांच टीम को उर्वरक की खरीद रसीद दिखानी होगी।
रसीद नहीं दिखा सका तो उसके खिलाफ सक्रिय की गई टीम निकटतम थाने में केस दर्ज करा सकती है।दुकानों पर खाद बिक्री रसीद किसानों को देने का सख्त आदेश दिया गया है। साथ ही समितियों को भी यह निर्देश दिया गया है कि किसान को उसके रकबे के आधार पर ही यूरिया दी जाए और जितनी खाद दी जाए उसकी पर्ची दस्तखत मोहर लगाकर समिति सचिव उपलब्ध कराएं।
जनपद के 86 साधन सहकारी समितियों पर भरपूर उर्वरक की उपलब्धता है, लेकिन किसानों को खाद के लिए दौड़ना पड़ रहा है। अधिकतर किसान सहकारी समितियों से निराश भी लौट रहे हैं। भरपूर खाद उपलब्धता के बाद भी खाद के लिए किसानों को परेशान देख विभाग सोचने पर मजबूर है कि खाद किसानों को नहीं मिल रही तो कहां जा रही है। इस बीच विभाग ने तस्करी पर कारगर रोकथाम का मास्टर प्लान बनाकर प्रभावी कर दिया है। विभिन्न विभागों से सहयोग लेते हुए कृषि विभाग की तरफ से जांच में न सिर्फ कर्मचारियों को लगा दिया है बल्कि उन्हें केस दर्ज कराने का अधिकार देकर कर्मचारियों के हाथ मजबूत कर दिए गए हैं। जांच में लगे सभी कर्मचारी खाद लेकर आने जाने वालों से रसीद मांग सकते हैं। साथ ही कलक्ट्रेट में बनाए गए कंट्रोल रूम को भी सक्रिय कर दिया गया है।