महराजगंज। इन दिनों आइसक्रीम की खपत बढ़ गई है। इससे धंधेबाजों ने पाउडर वाले दूध से आइसक्रीम बनानी शुरू कर दी। रंग-बिरंगी आइसक्रीम में फ्लेवर के लिए केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है।
शहर से लेकर गांव तक मिलावट वाली सस्ती आइसक्रीम की भरमार है। शहर में औसतन एक दिन में तीन से चार लाख की आइसक्रीम की बिक्री है। एक दुकान पर अधिकतम 10 हजार रुपये की आइसक्रीम की बिक्री का अनुमान है। ठेले को छोड़कर 30 से अधिक दुकानों पर आइसक्रीम बिकती है।
धंधेबाजों के खेल को हर कोई समझ नहीं पाएगा। सस्ती वाली रंग-बिरंगी आइसक्रीम सेहत खराब कर रही है। इसके सेवन से बच्चे बीमार हो रहे हैं। गर्मी बढ़ने की वजह से आइसक्रीम की खपत बढ़ गई है। स्थानीय फैक्ट्री पर सस्ती वाली आइसक्रीम बनती है। इसकी जांच कर कई बार नमूने लिए जा चुके हैं। अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
मांग बढ़ता देखकर धंधेबाज कम लागत में अधिक मुनाफा के चक्कर में हैं। करीब 54 लाख रुपये का पाउडर वाला दूध एक माह में खपत हो रहा है। इससे आइसक्रीम से लेकर अन्य चीजें बनाई जाती हैं। सूत्रों की माने तो सफेद चमक लाने के लिए आइसक्रीम में वाशिंग पाउडर मिलाया जाता है। शहर से लेकर गांव के चौराहों तक सस्ती आइसक्रीम बिक रही है।
गर्मी में लोग जगह-जगह लगने वाली रेहड़ी या दुकानों से कुल्फी, आइसक्रीम, गन्ने का रस, शेक, कोल्ड ड्रिंक, सैप जूस और फ्रूट जूस आदि का स्वाद लेने लगे हैं। गन्ने के रस में भले ही कुछ न हो, लेकिन गन्ना खराब होने पर उसमें मौजूद कीड़े आदि का पता नहीं चल सकेगा।
आइसक्रीम कारोबारी मनीष निगम बताते हैं कि शहर में ब्रांडेड कंपनियों के आइसक्रीम की मांग बढ़ी है। सस्ती वाली आइसक्रीम ठेले पर बिकती है। प्रयास रहता है की ग्राहकों को शुद्ध सामान मिले। 10 रुपये से लेकर 500 तक आइसक्रीम बिकती है। एक दुकान पर 10 हजार रुपये की आइसक्रीम बिकती है।
करीब 30 दुकानों पर तीन लाख रुपये की आइसक्रीम बिकने का अनुमान है। सत्यम ने बताया कि आइसक्रीम गोरखपुर और बनारस से मंगाई जाती है। स्थानीय कारखानों की बनी आइसक्रीम शहर के बाहर गांव में बिकती है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती वाली आइसक्रीम की मांग अधिक रहती है।
शहर में बिक रहा एक्सपायर्ड दूध, सेहत हो जाएगी खराब
महराजगंज। मिलावट के अलावा एक्सपायर्ड दूध की बिक्री हो रही है। धंधेबाज इसे खपाने के लिए जुटे रहते हैं। शहर में प्रत्येक दिन अगल-अलग कंपनियों की गाड़ी आती है। इससे दुकानों पर दूध की आपूर्ति होती है। पैकेट वाले दूध में एक्सपायर्ड डेट वाला भी आसानी से बिक जा रहा है। अगर कोई विरोध करता है तो नोकझोंक हो जाती है। शहर में फरेंदा रोड पर सोमवार को सुबह दुकानदार वरूण ने दो पैकेट दूध खरीदा। जल्दबाजी में वह दूध लेकर चले गए। दूध गर्म करने पर फट गया। इसके बाद पैकेट पर एक्सपायरी डेट देख वह सन्न रह गए। दुकानदार से उन्होंने पूरी बात बताई तो वह मानने को तैयार नहीं हुआ। इसी तरह से नरेंद्र कुमार ने कॉलेज रोड से एक दुकान से दूध लिया था। उन्होंने बताया कि चाय बनाने के लिए दूध खरीदा गया था। घर में उसका उपयोग होने के बाद पैकेट देखने पर पता चला की एक्सपायर हो चुका है। अब तो खरीदारी से पहले जांच करनी पड़ेगी। लापरवाही से सेहत खराब हो सकती है। एक अनुमान के अनुसार शहर में 25000 लीटर प्रत्येक दिन पैकेट वाले वाले दूध की खपत है।