स्वस्थ पेशे की बीमार तस्वीर
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला अस्पताल में व्हील चेयर मरीजों के लिए नहीं बल्कि दवा ढोने के काम आ रही है। तीमारदार पीठ पर मरीजों को लेकर अस्पताल में इधर-उधर भटकने को विवश हैं। बदहाल व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदार बेखबर हैं। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
शुक्रवार को परसामलिक क्षेत्र के तरैनी गांव के रहने वाले रामलगन दर्द से कराहते हुए परिजनों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे थे। 79 साल के रामलगन को उनके नाती अंकित पीठ पर लादकर ले जा रहे थे। अंकित बताते हैं कि ओपीडी में डॉक्टर से जांच कराया तो वहां से इमरजेंसी में ले जाने की सलाह दी। ओपीडी में कहीं व्हीलचेयर या स्ट्रेचर नहीं था। ऐसे में चल-फिर पाने से मजबूर दादा को पीठ पर लेकर जाना पड़ा।
-नवजात शिशु देखभाल इकाई में 26 बेड पर भर्ती हैं 32 बच्चे
जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। 26 बेड पर 32 बच्चे भर्ती हैं। एक बेड पर दो-दो नवजातों का उपचार किया जा रहा है। यह वह नवजात हैं, जिनका जन्म समय से पहले हुआ हो, वजन कम हो, अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। इन्हें अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जो आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। ऐसे में बेड कम होने से परिजनों को निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ता है।
व्हीलचेयर मरीजों की सुविधा के लिए रखी गई। जरूरतमंदों को उपलब्ध कराई जाती है। अगर ऐसी बात है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
-डाॅ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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सावधान! निजी सेंटरों की जांच रिपोर्ट को करा लें क्रॉसचेक
कई जांच सेंटरों पर अप्रशिक्षित कर्मी जैसे तैसे बना देते रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड या कोई जांच कराई है तो सजग रहें। रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करें। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट में अंतर मिला है। वजह है इन सेंटरों पर डॉक्टर की जगह अप्रशिक्षित कर्मी जांच कर रहे हैं। बीते दिनों में स्वास्थ्य विभाग के छापे में यह तथ्य सामने आ चुका है। बता दें जिले में 51 अल्ट्रासाउंड सेंटर व 40 पैथाेलाॅजी सेंटर पंजीकृत हैं जबकि हकीकत में इससे दोगुना सेंटर संचालित हो रहे हैं।
केस एक
पिछले दिनों में तबीयत खराब हुई तो डॉक्टर ने जांच को लिखा। एक निजी लैब में जांच कराई तो रिपोर्ट में यूरिक एसिड़ बढ़ा दिखाया गया। रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने दवा लिख दी। दो दिन दवा खाने में दूसरी तरह की समस्याएं होने लगी तो गोरखपुर इलाज कराने गया। वहां जांच कराया तो पता चला की यूरिक एसिड बढ़ा ही नहीं है। शुगर का स्तर थोड़ा से बढ़ा हुआ था। वहां की दवा चली तो अब कोई समस्या नहीं हो रही है।
अनिल यादव, रायपुर
केस दो
पेट में दिक्कत होने पर डॉक्टर को दिखाया गया। उन्होंने अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी गई। एक निजी सेंटर पर जांच कराई तो रिपोर्ट में पथरी की शिकायत आई। बाद में गोरखपुर एक जांच कराई तो रिपोर्ट में पथरी नहीं मिली। वहां के डॉक्टर की दवा से आराम भी मिल गया।
मंजू देवी, खोन्हौली
कोट
अभियान चलाकर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर सेंटरों को सील किया जाता है। नियम के विपरीत जिले में अल्ट्रासाउंड व पैथोलाॅजी सेंटर संचालित नहीं होने दिए जाएंगे।
-डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी