महराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में 26 बेड पर 36 नवजात भर्ती हैं। इससे इलाज में थोड़ी समस्या बढ़ गई है। डॉक्टर को अधिक सतर्कता बरतनी पड़ रही है। जन्म के बाद बीमार होने वाले बच्चों को इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। इस समय वार्ड में क्षमता से अधिक बच्चे भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। एक बेड पर दो-दो नवजातों का उपचार किया जा रहा है। यह वह नवजात हैं, जिनका जन्म के समय वजन कम है, अथवा पीलिया या सांस फूलने की समस्या से ग्रसित हैं। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 26 बेड हैं, वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है। आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। शुक्रवार को यहां 36 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि सावधानीपूर्वक इलाज किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर ढंग से इलाज करने की कोशिश जारी है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. एपी भार्गव ने बताया कि अस्पताल में बेहतर ढंग से सुविधा मिलती है। भर्ती बच्चों का ठीक से इलाज किया जा रहा है।