महराजगंज। चीन में बने सेंट नेपाल के जरिए भारतीय बाजारों में आ रहे हैं। देश के बड़े महानगरों तक तस्कर पहुंच रहे हैं। परफ्यूम के छोटे-छोटे खेप झोले में रखकर पगडंडियों से सरहद पार करा दिया जाता है। मौका देखकर इसे गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है। तस्करी के इस खेल में लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है। दामों में काफी अंतर होने से भारत में इसकी डिमांड बढ़ गई है।
सूत्रों की माने तो चीन से भारत में इम्पोर्ट के लिए एमआरपी रखने के साथ ड्यूटी 18 प्रतिशत है, जबकि नेपाल में एमआरपी नहीं है। वही समान नेपाल में इम्पोर्ट करने पर आठ प्रतिशत होती है। नेपाली मुद्रा में भी अंतर है। इसके कारण दोगुने लाभ को लेकर नेपाल के रास्ते चाइनीज परफ्यूम की तस्करी बढ़ गई है। बीते दिनों सेंट की बरामदगी हुई थी। भारत नेपाल की खुली सीमा तस्करों के लिए मुफीद है। निचलौल से लेकर सोनौली और कोल्हुई तक जनपद के 84 किलोमीटर में फैला हुआ है, जो नेपाल सीमा से सटे हुए है।
इस लंबी सीमा पर केवल दस चेकपोस्ट है। तस्कर प्रमुख बाजारों फरेनिया और भगवानपुर सोनौली, बरगदवा, परसामलिक, ठूठीबारी, झुलनीपुर में अपना रास्ता बनाते हैं। प्रतिदिन 2.5 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं। सूत्रों ने बताया कि कार में रखकर तस्कर आसानी से लेकर चले जाते हैं। अगर मुखबिरी होती है तो मामला पकड़ में आ जाता है, नहीं तो तस्कर आसानी से लेकर चले जाते हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमा पर कड़ी चौकसी बरती जा रही है। पुलिस सीमावर्ती क्षेत्र में समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई करती है।
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मूल्य में है 10 गुना का अंतर
चाइनीज परफ्यूम नेपाल में 500 से लेकर 2000 रुपये में उपलब्ध है। वही परफ्यूम भारत में 6,000 से 40,000 रुपये तक बिकता है। नेपाल में चाइनीज सेंट का कारोबार अधिक सी, कैंडी बेबी, स्विट हार्ड जैसे महत्वपूर्ण ब्रांड की कापी आयात की जाती है। भारत में चीनी उत्पादन के सामानों के आयात शुल्क अधिक है। उसी समान की ब्रांड कॉपी नेपाल से तस्करी कर भारतीय ग्राहकों को महंगे दामों पर उपलब्ध कराकर भारत सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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सीमाओं के निकट गांव में किया जाता है डंप
जनपद के सोनौली क्षेत्र के खनुवा, भगवानपुर चौकी के समीप मदरी एवं निचलौल के गांव में तस्करी के सामान डंप किए जाते हैं। फिर बाइक और साइकिल से समान को भारत के सीमावर्ती गांव में डंप किया जाता है। मौका मिलते ही छोटे वाहनों सहित लग्जरी वाहनों से दिल्ली भेज दिया जाता है। कम समय, कम रिस्क और छोटी पूंजी से अधिक मुनाफा के चलते मदरी और खनुवा, निचलौल, ठूठीबारी, बरगदवा, कोल्हुई गांव के रास्ते सीमा तक दर्जनों कैरियर ऐसे समान ढोने के काम में लगे हैं।
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खुली सीमा का उठा रहे लाभ
नेपाल सीमा से लगने वाली जिले की 84 किलोमीटर जनपद की सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यहां बिना रोक-टोक के दोनों देश के लोग आते-जाते हैं, लेकिन देश विरोधी तत्व दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है तो उसकी तस्करी शुरू कर देते हैं। चाहे वह चरस, कबाड़ और अन्य सामान हो या फिर अनाज या तिलहन हो, या परफ्यूम जिसमें मुनाफा औैर मांग बढ़ी, उसे इस पार से उस पार ले जाने का काम शुरू हो जाता है। खुली सीमा में करीब 104 पगडंडियां हैं, जिनका प्रयोग सिर्फ तस्करी के लिए किया जाता है।