महराजगंज। साइबर जालसाज लोगों को लिंक भेज कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। एक युवक के व्हाट्सएप पर टास्क भेजकर जरूरी डेटा फीड करके सबमिट करने को कहा गया। ऐसा करने पर युवक के खाते से एक लाख रुपये निकाल लिए गए। ऐसे कई अन्य मामलों में सामने आ चुका है कि लोगों की मामूली सी गलती उनके बैंक खातों को खाली करवा दे रही है। ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ितों के हाथ केवल मायूसी लगती है। सिसवा के अनुराग के साथ साइबर साइबर जालसाजी हुई है। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले मोबाइल पर टेलीग्राम ग्रुप और गूगल डाटा टास्क ग्रुप में मेरा नंबर जोड़ दिया गया। इसके बाद ग्रुप में एक लिंक डाला गया। इसे क्लिक करने के लिए कहा गया। बताया गया कि जरूरी डेटा भरने के बाद खाते में पांच हजार रुपये की रकम आ जाएगी। डेटा एक कंपनी भरवा रही है। ऐसा जानकर भरोसा हो गया तो लिंक पर क्लिक कर दिया। इसके बाद नाम दर्ज करने के साथ ही खाता नंबर समेत अन्य विवरण दर्ज कर दिया। पूरी जानकारी दर्ज होने के बाद मोबाइल पर ओटीपी आया। ओटीपी बताने के 10 मिनट बाद मोबाइल पर एक लाख रुपये खाते से कट जाने का संदेश आया। तब जाकर ठगी का एहसास हुआ।
केस नंबर एक
13 जून 2024 को बुधवार को ग्राम बभनी बुजुर्ग में पुलिस ने छापा मारा तो 14 साइबर अपराधी पकड़े गए थे। गैंग यूपी, छत्तीसगढ़ और बिहार के विभिन्न जिलों में साइबर फ्रॉड करता था। छत्तीसगढ़ और बिहार में यह गैंग लोगों से गेमिंग एप के माध्यम से धोखाधड़ी करके फेसबुक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापन एड डालने का काम करता था। आरोपी ऑनलाइन रुपये लेकर हार-जीत की आदत लगाकर करोड़ों की ठगी करते थे।
केस नंबर दो
7 अक्तूबर 2025 को वीर बहादुर नगर वार्ड नंबर-24 निवासी मोहम्मद अतहर खान (पिता बुनियाद खान) के साथ साइबर ठगों ने बड़ी धोखाधड़ी की थी। ठगों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के क्रेडिट कार्ड से मात्र कुछ मिनटों में 5 अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर कुल 1,94,708 रुपये ठग लिए थे। अतहर खान समझ नहीं पाए कि पैसे किस तरह से निकाले गए।
सावधानी बरतना जरूरी:
-अनजान लोगों से सोशल मीडिया पर दोस्ती न करें।
-किसी को भी अपनी निजी फोटो या वीडियो न भेजें।
-किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
-अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अवश्य करें।
-अनजान लोगों की ओर से भेजे गए एपीके फाइल पर क्लिक न करें।
-फोन पर या ऑनलाइन किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खातों, ओटीपी, पासवर्ड की जानकारी न दें।
सतर्कता ही साइबर ठगी बचाव