महराजगंज। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में कौशल भारत (एसआईसी) के प्रोजेक्ट में विद्यार्थियों की फर्जी उपस्थिति और फिंगरप्रिंट के जरिये जनपद में वित्तीय सत्र 2024-25 में लाखों का वारा न्यारा हुआ। यह गड़बड़झाला राजकीय से हुआ या निजी आईटीआई काॅलेजों से हुआ यह तय नहीं है।
केंद्रीय टीम के निरीक्षण और रिपोर्ट के बाद प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था ने जनपदीय पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस इस मामले में जहां तहरीर के लिए किसी जिम्मेदार की खोज में है। वहीं विभाग का कहना है कि यह तकनीकी त्रुटि है।
केंद्रीय टीम की तरफ से मेल भेजकर जवाब मांगा गया था जो भेजा भी गया, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी से जवाब उन्हें नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने मामले में पुलिस महानिदेशक को गड़बड़ी की शिकायत कर दी जहां से पत्र जारी हो गया।
जिले में नोडल आईटीआई के प्राचार्य मसूद इसरत के मुताबिक इस योजना में विभिन्न शार्ट टर्म प्रशिक्षण पीएम विश्वकर्मा, पीएम सूर्य घर सहित अन्य के लिए प्रशिक्षु तलाश कर प्रशिक्षण देना होता है। बीते सत्र में राजकीय आईटीआई में सिर्फ माधो नगर व महराजगंज को दायित्व व धनराशि दी गई थी, जबकि निजी आईटीआई काॅलेजों को 30-30 लाख रुपये अवमुक्त किए गए। जांच के लिए फरवरी में केंद्रीय टीम आई थी, जिसने एक निजी काॅलेज में प्रशिक्षुओं की उपस्थिति जांची। इसमें कोई प्रशिक्षु नहीं मिला, जबकि उपस्थिति दिखाकर भुगतान लिया जा चुका था।
इसी मामले में जवाब मांगा गया था। राजकीय आईटीआई काॅलेजों की तरफ से हमने निरीक्षण के तीसरे दिन ही जवाब व काॅलेज व सीसीटीवी रिकार्डिंग का पेन ड्राइव भेज दिया कि जितने प्रशिक्षु का धन दिया गया उन्हें प्रशिक्षण लेते सीसीटीवी में देखा जा सकता है। टीम इसपर संतुष्ट भी हुई। निजी काॅलेजों की तरफ से क्या जवाब दिया गया इसकी जानकारी नहीं है।