लोगों ने नाम में संशोधन नहीं होने से भी परेशानी होने की बात कही
महराजगंज। जनगणना 2027 के तहत जारी स्व गणना प्रक्रिया के तहत ओटीपी देर से पहुंचने के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है। लोगों की शिकायत है कि कुछ लोगों ने संशोधन का विकल्प नहीं होने से भी परेशानी की बात बताई है।
शनिवार को संवाद न्यूज़ टीम ने ऐसे लोगों से मुलाकात कर यह जानने का प्रयास किया कि स्व गणना में क्या दिक्कत आ रही है। नेहरू नगर निवासी अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि ओटीपी आधारित स्व गणना प्रक्रिया है, लेकिन ओटीपी काफी लेट पहुंच रहा है जिससे एक से दो बार प्रक्रिया दोहरानी पड़ रही है। ओटीपी दर्ज करने का टाइम निर्धारित है तय समय में ओटीपी नहीं भरी जा रही है तो प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ रही है। वीर बहादुर नगर निवासी पिंटू गुप्ता ने बताया कि बदलने का विकल्प प्रक्रिया में नहीं है। अगर एक बार परिवार के मुखिया का नाम गलत फीड कर सेव किया तो फिर बदलाव नहीं हो पा रहा है। फरेंदा हाईवे पर बुक सेंटर चलाने वाले संजय पटेल ने बताया कि गूगल मैप पर टैगिंग प्रक्रिया में दिक्कत आ रही है। मोबाइल पर मैप जूम करके टैगिंग करना पड़ रहा है।
जनगणना 2027 के तहत स्व गणना की प्रक्रिया जारी है। यह कवायद 21 मई तक प्रभावी रहेगी। 22 मई से मकान गणना (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन) का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर डिजिटल एप के माध्यम से परिवार और मकान से जुड़ी विस्तृत जानकारी दर्ज करेंगे।
प्रशासन लोगों को स्व गणना के लिए पहले दिन से ही जागरूक करने में जुटा है। शनिवार डीएम गौरव सिंह सोंगरवाल ने सभी विभागों से अपील करते हुए कहा कि अपने-अपने विभाग के मार्फत जनपद वासियों को स्व गणना के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़ों की सटीकता के लिए स्व गणना महत्वपूर्ण है। बताया कि अगर लोग स्व गणना खुद से नहीं कर रहे तब भी प्रगणक मकान सत्यापन के वक्त घर के लोगों से पूछकर सूचना भरेंगे, लेकिन अगर सभी लोग पहले ही पूछे गये प्रश्नों का जवाब नागरिक पोर्टल पर फीड कर देते हैं तो प्रगणकों का समय बचेगा और वह सत्यापन तेजी से निपटा सकेंगे।
वर्जन
जिले में स्व गणना प्रक्रिया प्रभावी है। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग व पंचायतीराज विभाग वृहद जागरूकता के कार्य गांव गांव प्रभावी कर चुके हैं। शीघ्र ही इसके लिए मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा जहां संपर्क कर लोग स्व गणना में आ रही समस्या का निराकरण करा सकेंगे।
-डॉ. प्रशांत, एडीएम, महराजगंज।