डिजिटलीकरण के दौर में भ्रामक सूचना से यात्री झेलते असुविधा
फरेंदा में नहीं है कोई बस स्टेशन, परिवहन विभाग की वेबसाइट पर दी गई भ्रामक जानकारी
महराजगंज। डिजिटल व एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के दौर में यूपीएसआरटीसी की वेबसाइट पर भ्रामक सूचना यात्रियों की दुश्वारी बढ़ा रहा है। वेबसाइट पर गोरखपुर परिक्षेत्र के 18 बस स्टेशनों में फरेंदा का नाम दर्ज लेकिन हकीकत में यहां पर कोई बस स्टेशन नहीं है।
परिवहन निगम की आधिकारिक वेबसाइट अपग्रेड करके ऑनलाइन टिकट बुकिंग से लेकर अन्य तरह की डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी वेबसाइट पर गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन 18 बस स्टेशनों में महराजगंज और सोनौली का जिक्र है लेकिन महराजगंज व सोनौली के अलावा फरेंदा में बस स्टेशन है ही नहीं। यात्री अगर फरेंदा में बस स्टेशन की सहूलियत समझकर अपनी यात्रा प्लान करते हैं तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। कारण कि यहां बस स्टेशन तो की कौन कहे रोडवेज बसें खड़ी करने के लिए विशेष जगह तक निर्धारित नहीं है। फरेंदा होकर सिद्धार्थनगर, नौतनवां, सोनौली व बृजमनगंज के लिए रोडवेज बसें तो चलती हैं लेकिन स्टॉपेज सड़क ही है।
डिजिटल दौर में फैला रहे भ्रम
फरेंदा निवासी डॉ. विपिन चौधरी व पेशे से सीए रवि चौधरी ने बताया कि आज डिजिटल का दौर है। लोग आवागमन के लिए अक्सर वेबसाइट ही खंगालते हैं। ऐसे में विभागीय वेबसाइट पर ही भ्रामक जानकारी मुश्किल खड़ी करती है। यदि विभाग की वेबसाइट के अनुसार यात्री अपनी योजना तैयार करेंगे तो उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
बस स्टेशन स्वीकृत, लेकिन जमीन ही नहीं
फरेंदा में बस स्टेशन की बात करें तो विधायक वीरेंद्र चौधरी की पहल पर बस स्टेशन निर्माण तो तीन वर्ष पहले स्वीकृत है। लेकिन इसके लिए जमीन आज तक विभाग नहीं तलाश सका है। एक जमीन दो वर्ष पहले हैंडओवर भी हुई लेकिन वह विवादित निकली। दूसरी जगह की कोई जमीन आज तक डिपो को नहीं हैंडओवर हो सकी है।
वर्जन
फरेंदा में बस स्टेशन निर्माण की स्वीकृति तो मिल चुकी है लेकिन जमीन अभी हैंडओवर नहीं हुआ है। जमीन फरेंदा बाईपास पर चिह्नित किया गया है लेकिन अभी प्रशासन से इसका हैंडओवर मिलना बाकी है। जमीन मिलते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। वेबसाइट से भ्रामक जानकारी हटाने के लिए विभाग की तकनीकी टीम को पत्र भेजा जाएगा।
-सर्वजीत वर्मा, एआरएम, महराजगंज।