महराजगंज/फरेंदा। कस्बे के एक बाइक शोरूम का गड़बड़झाला सामने आते ही लोग सन्न रह गए। बाइक खरीदने के दौरान दिए जाने वाले प्रपत्र को उपयोग करके ग्राहकों को कर्जदार बना दिया गया।
तीन माह बाद बाइक की किस्त लेने फाइनेंस कर्मी घर पहुंचे तब पोल खुली। इसके बाद मंगलवार को ग्राहक शोरूम पहुंचकर हंगामा किए। मामले में पीड़ितों ने तहरीर नहीं दी है। फाइनेंस कंपनी के कार्यकर्ता व एजेंसी संचालक को थाने लाकर पुलिस ने पूछताछ की।
करीब तीन माह पहले फरेंदा कस्बे में स्थित एक शोरूम से बाइक खरीदने वाले परेशान हैं। उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मामला गर्म होने के बाद मैनेज का खेल भी शुरू हो गया है। यही वजह है कि इस प्रकरण में तहरीर नहीं पड़ी है। करीब 80 लोगों के साथ हुए धोखाधड़ी के मामले के बाद से ही बातों व कायदे कानून के जाल में फंसाकर गुमराह किया जा रहा है। इस वजह से मजबूती के साथ कोई सामने नहीं आ रहा है।
मंगलवार को हुए हंगामा के बाद से ही शोरूम के जिम्मेदार बचाव का रास्ता खोजने के साथ ही विधिक राय लेने में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर नकद देने के बाद भी कर्जदार बने लोग हंगामे के बाद से वक्त का इंतजार कर रहे हैं। उनको उम्मीद है कि कर्ज हट जाएगा। नकद देकर बाइक लेने वाले जितेंद्र कहते हैं कि नकद खरीदी गई बाइक को फाइनेंस का बताया जा रहा है।
बैकों से जब फोन आने शुरू हुए तो मामले की जानकारी हुई। कुछ लोगों का फर्जी दस्तावेज भी तैयार करके उनके नाम से लोन करा दिया गया है। लोन पर बाइक लेने के लिए आवेदन भी नहीं किया था। एजेंसी मालिक से गड़बड़ी की जानकारी के बारे में पूछने पर संतोषजनक जवाब भी नहीं दे रहे हैं। इस प्रकरण को लेकर उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने में पुलिस टीम लगी है।
थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार पाठक ने बताया कि ग्राहकों की शिकायत के अनुसार जांच-पड़ताल की जा रही है। कुछ पीड़ित रुपये वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी को सोमवार तक का समय दिया गया है।
नकद देकर गाड़ी खरीद कर दहेज में दिया : बिना बताए ग्राहकों के दस्तावेज लेकर उनके नाम से बाइक फाइनेंस कर दी गई, जो लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। कई लोगों ने नकद देकर गाड़ी खरीद कर दहेज में दिए। अब पता चल रहा है कि गाड़ी पर लोन है तो उनके पांव तले जमीन खिसक रही है।
क्षेत्र के अविनाश, ध्रर्मेद्र, अनिल सिंह, राकेश मौर्य, पंकज कुमार, रमेश, भीमसेन, रामदास, अब्रीस सहित तमाम लोगों ने बताया कि एजेंसी की मिली भगत से बिना बताए सिर पर आर्थिक बोझ डालने का काम किया गया है। एजेंसी पर बैठने वाले फाइनेंस के लोग कम कीमत पर गाड़ी देने का प्रलोभन देकर ठगने का काम किया है। आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।