घुघली। भरत राम कथा के महत्वपूर्ण पात्र हैं। उनकी भगवान के प्रति श्रद्धा, आस्था, त्याग, धर्म परायणता व भक्ति की कोई दूसरी मिसाल हो ही नहीं सकती। भगवान राम की भक्ति के लिए भरत का चरित्र पर ध्यान देना जरूरी हैं, क्योंकि बिना भरत के चरित्र का राम की भक्ति हो ही नहीं सकती। संसार भले ही राम नाम का जप करता है लेकिन भगवान राम सदा भरत के नाम का जाप किया करते हैं।
ये बातें हरखा प्यास में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा वाचक राजन जी महराज ने कही। वे शंकर पांडेय व वरुण पांडेय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में श्रोताओं को भरत चरित्र का वर्णन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भरत से बड़ा धर्म व्रत, त्याग व संकल्प लेने वाला संसार में कोई नहीं हुआ हैं। भरत की त्याग, तपस्या, धर्म परायणता से संत मुनियों को नई ऊर्जा प्राप्त होती है। रामायण में भरत का नौ बार शब्द आया है। भरत जी को दंभ, लोभ, काम, आदि का नाशक माना जाता है। वह प्रेम भक्ति श्रद्धा, आस्था, त्याग, तपस्या, नियम, संयम के प्रतीक हैं। उनकी भक्ति से मनुष्यों को यह सभी चीजे आसानी से मिल जाती है।
कथा वाचक राजन जी ने कहा कि भगवान कहते हैं कि हमने सभी जीव पैदा किए हैं, सभी हमें प्रिय है, लेकिन भरत जी भगवान राम के प्रिय हैं। इसलिए भगवान का प्रिय बनने के लिए भारत का प्रिय बनना आवश्यक है। जिनका आचरण धर्म बन जाए उसे भरत कहते हैं। भरत और राम जैसे भाई से सीख लेनी चाहिए। भरत का व्यक्तित्व, इतना कोमल व दयावान है को वो अपनी प्रजा को किसी प्रकार का दुख,तथा समृद्धि में कोई कमी का पूरा ध्यान रखते थे। कथा के दौरान, शंभू पांडेय, वरुण पांडेय, विनोद पांडेय मौजूद रहे।