अड्डा बाजार। महुअवा अड्डाराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में भरत-मिलाप कर समापन कर दिया गया। कलाकारों ने प्रह्लाद की भक्ति और भगवान नृसिंह के हाथों हिरण्य कश्यप वध का मंचन किया।
मंचन में दिखाया कि निर्धारित समय के भीतर राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, विभीषण और सुग्रीव एक साथ अयोध्या पहुंचे। प्रतीक्षा कर रहे भरत और शत्रुघ्न सबके गले मिले। राम का राज्य अभिषेक कर दिया गया। जय घोष के बाद भक्त प्रहलाद नाटक मंचन आरंभ हुआ। असुर राज हिरण्य कश्यप अपनी गर्भवती पत्नी कयाधु को राजमहल छोड़कर ब्रह्मदेव की तपस्या करने चले गए। इस बात की जानकारी पाकर देवराज इंद्र ने आक्रमण कर दिया। कयाधु का अपहरण करके देवलोक ले जाने लगे। रास्ते में देवर्षि नारद मिले और कयाधु को मुक्त करा कर अपने आश्रम ले गए। आश्रम में कयाधु ने देवर्षि की बहुत सेवा कीं। भक्ति माहौल में गर्भस्थ शिशु पर गहरा प्रभाव पड़ा। उस शिशु का नाम प्रह्लाद रखा गया। हिरण्य कश्यप उग्र व कठोर तपस्या से ब्रह्मदेव को प्रसन्न करके मनचाहा वरदान पाकर लौटे।
हिरण्य कश्यप नारदजी के आश्रम पहुंचे। उनके आगे सिर झुका कर आभार व्यक्त किश्स। पत्नी कयाधु व पुत्र प्रह्लाद को राजमहल ले गए। वरदान के अहंकार में चूर हिरण्य कश्यप खुद को ईश्वर मान बैठा। अपने ही पुत्र की हरि भक्ति से चिढ़ने लगा। हर भक्ति छुड़ाने के लिए पुत्र प्रह्लाद को तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। जान से मारने तक की कोशिश की गई, लेकिन प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ।