महराजगंज। रक्षाबंधन पर मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन बाजारों में बिकने वाली मिलावटी मिठाई सेहत खराब कर सकती हैं। दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट की अधिक आशंका रहती है।
मिलावटखोर भी माेटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत से खेलने से नहीं चूकते हैं। जानकारी के अनुसार, दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा संभावना रहती है। इससे बचने के लिए कुछ लोग घरों में ही मिठाई बना लेते हैं।
शहर में 50 से ज्यादा मिठाई की दुकानें हैं। बाजार में वनस्पति घी में थोड़ी मात्रा में देसी घी व खुशबू मिलाकर देसी घी नाम के डिब्बे में पैकिंग की जाती है। विशेषज्ञों की माने तो बढ़ी हुई मांग को देखते हुए सबसे अधिक मिलावट मावा और मिठाइयों में होने की आशंका है।
कई मामलों में स्टार्च, सिंथेटिक दूध, वनस्पति फैट और रासायनिक रंग का उपयोग कर नकली मिठाइयां तैयार की जाती हैं जो लिवर, किडनी और आंतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।