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सेना के जवान की मौत पर गम में डूबे परिजन, गांव में लगी लोगों की भीड़

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शहीद चंद्रबदन के रोते बिलखते परिजन। - फोटो : MAHARAJGANJ
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सेना के जवान की मौत पर गम में डूबे परिजन, गांव में लगी लोगों की भीड़
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- अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल है परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जम्मू कश्मीर के चिनाव नदी के किनारे सिसवनिया गांव के रहने वाले सेना के जवान चंद्रबदन शर्मा की मौत हो गई। उनके मौत की खबर शनिवार की सुबह जैसे ही गांव में पहुंची परिजन फूट-फूट कर रो पडे़। लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल हैं। परिजनों के मुताबिक रविवार की शाम तक पार्थिव शरीर घर पहुंचेगा। मौत के कारणों की सटीक जानकारी की पुष्टि प्रशासन की ओर से नहीं की गई।
शनिवार की सुबह को सिसवनियां गांव में सेना के जवान चंद्रबदन शर्मा (25) के घर पर तमाम लोग पहुंचे। सभी उनके अंतिम दर्शन की आस लगाए बैठे हैं। चंद्रबदन शर्मा के पिता भोला शर्मा गुजरात में रह कर काम करते हैं। उनके बेटे के मौत की जानकारी हुई तो वह बेहोश हो गए। वह गुजरात से घर के लिए रवाना हो चुके हैं।
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चंद्रबदन की मां का निधन वर्ष 2000 में हुआ था। चंद्रबदन मां के निधन के बाद अपने भाई एवं बहन की परवरिश को लेकर बहुत गंभीर थे। यही कारण था की दोनों को कामयाब बनाने के लिए दूसरे शहर में परीक्षा की तैयारी करने के लिए भेजा है। चंद्रबदन के परिजनों ने बताया कि 10 फरवरी से उनको एक माह की छुट्टी की स्वीकृति मिली थी। भाई एवं बहन को इसकी जानकारी उन्होंने मोबाइल फोन से दी थी। इस बात की जानकारी होने पर परिवार के सभी लोग खुश थे। लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि उनकी मौत की खबर आएगी। चंद्रबदन की दादी रामरति देवी का रो रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार यही कह रही थीं कि बाबू 10 फरवरी को आने वाला था। अब उसकी मौत की सूचना मिल रही है। यही कहकर वह बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि मौत के कारणों की सटीक जानकारी लिखित रूप में नहीं मिली है। जैसे ही कोई जानकारी मिलेगी उसको बताया जाएगा।
परिवार में सबसे बडे़ थे चंद्रबदन
चंद्रबंदन परिवार में सबसे बड़े भाई थे। उनका छोटा भाई विमल शर्मा प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है। वहीं बहन काजल शर्मा गोरखपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करती है। चंद्रबदन भाई और बहन की पढ़ाई को लेकर गंभीर थे। समय-समय पर उन्हें फोन पर मार्गदर्शन देते थे। भाई के मौत की खबर सुनकर छोटे भाई एवं बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
अभी नहीं हुई थी शादी
पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ से दबे चंद्रबदन की शादी अभी नहीं हुई थी। उनका सपना था की अपने दोनों भाई बहन को कामयाब बना दें। वह भी अच्छी नौकरी करें। इसके लिए भाई बहन को प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने के भेजे थे।
मार्च में तीन साल पूरा होता नौकरी करते
सेना में सिग्नल कोर में तैनाती मार्च 2018 में हुई थी। मार्च माह में नौकरी करते हुए तीन साल होता। नौकरी में जाने के बाद वह परिवार की हर छोटी बड़ी जिम्मेदारी को बखुभी निभाते रहे। उनका प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राइमरी स्कूल के शुरू हुई थी। एमए तक की पढ़ाई उन्होंने की थी।
फफक पड़े दोस्त
चंद्रबदन के दोस्त मृत्युंजय गुप्ता, हरिकेश शर्मा, मणि शर्मा, अवधेश शर्मा, अजय गुप्ता, विजय गुप्ता, प्रह्लाद यादव को जैसे ही घटना की जानकारी मिली। फूट-फूटकर रोने लगे। सभी ने सिसकते हुए दोस्त के साथ गुजरे वक्त को याद करने लगे। उनकी बातों को सोचकर फफक पड़े। सभी ने कहा कि चंद्रबदन बहुत मिलनसार थे। सभी से सजह भाव से बाते करना और हालचाल पूछना उनकी आदत थी। परिवार में वह सभी के चहेते थे।
हर जगह होने लगी चर्चा
सिसवनियां गांव के पास चाय की दुकान पर बैठे बुजुर्ग रामदरश शर्मा ने कहा कि इतनी कम उम्र में ही चंद्रबदन बेहद समझदारी की बातें करते थे। अगर कोई उनके सामने से गुजर जाए तो उसे प्रणाम कर आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर को यही मंजूर था। अब नियती को कौन टाल सकता है।
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परिजनो को सांत्वना देने पहुंचे नेता
भाजपा के सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया, नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल, अरूणेश शुक्ला, संजीव शुक्ला, हियुवा नेता संजय यादव, वीरेंद्र लोहिया, सूर्यनाथ, अरविन्द मौर्य के अलावा सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश यादव अपने साथियों के साथ परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे।
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