महराजगंज। दो दिन पहले कुशीनगर में हुई सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी किसानों और महिलाओं को पार्टी के प्रति आकर्षित करने के लिए खूब सराहा। अपने 22 मिनट के उद्बोधन में शाह आधे समय तक किसानों और महिलाओं को ही सहेजते दिखाई पड़े। किसानों को जहां उन्होंने देश की रीढ़ बताया वहीं महिलाओं के लिए उनके अधिकार की पैरवी करते रहे।
महिलाओं को उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में सरकार बनी तो उन्हें महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात आदि राज्यों की ही तरह सुरक्षा के साथ हर क्षेत्र में भागीदारी और सम्मान मिलेगा। यही नहीं, महिलाओं को तवज्जो देते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से यहां तक अपील कर डाली की 2017 का यूपी चुनाव महिला आधारित बनाया जाए।
मंच पर शाह के माइक संभालते ही महराजगंज के इंदिरानगर इलाके की कई महिलाओं ने जब मकान की मांग लेकर उन तक ज्ञापन पहुंचाने की पुलिस प्रशासन से जिद की तो उन्होंने तत्काल संबोधन रोककर उन्हें आश्वस्त किया कि सभा खत्म होने के बाद वह खुद उन तक आएंगे। सभा खत्म होने के बाद वे मंच से उतरकर महिलाओं के पास पहुंचे भी। उन्हें सुना और उनकी समस्याआें के जल्द निस्तारण के लिए आश्वस्त भी किया।
तीन तलाक का मसला उठाकर वह मुस्लिम महिलाओं को भी सहेजना नहीं भूले। मोदी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संकल्प लिया था कि महिलाओं को लकड़ी के धुएं से आजादी दिलाएंगे। उज्जवला योजना इसी की एक कड़ी है। अब तक देश के 35 लाख घरों की रसोई से धुआं खत्म हो चुका है।
यही नहीं, पान की दुकानों, चौराहों से लेकर राजनीतिक मंच तक जहां सिर्फ नोटबंदी की चर्चा आम है वहीं शाह ने सलीके से समय का बंटवारा कर जहां विपक्ष पर तंज किया वहीं प्रदेश की सपा सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। बोले, प्रदेश में कहीं पर भी महिलाएं अपने को सुरक्षित नहीं मान रहीं।
लूट, हत्या और छिनैती की घटनाएं चरम पर हैं। थानों में भी कोई सुनवाई नहीं होती। पुलिस और प्रशासन सपाइयों की कठपुतली बनकर रह गया है। केंद्र जो रुपया किसानों, गरीबों और बेरोजगारों के लिए भेज रहा, सपाई उससे अपना घर बसा रहे।