महराजगंज। मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए राहत की खबर है। स्वास्थ्य विभाग ऐसी अत्याधुनिक तकनीक लाने जा रहा है, जिससे बिना खून का सैंपल लिए ही मधुमेह की जांच की जा सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) पर आधारित यह तकनीक मरीजों के शरीर की सतह से कुछ विशेष संकेतों को पढ़कर उनके रक्त में ग्लूकोज के स्तर की सटीक जानकारी देगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस तकनीक में एक विशेष सेंसर का उपयोग किया जाता है जो एआई पर आधारित है। इस तकनीक से न केवल समय की बचत होगी बल्कि मरीजों को बार-बार अस्पतालों या जांच केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गैर-आक्रामक (नॉन-इनवेसिव) है, यानी इसमें खून निकालने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। सेंसर त्वचा पर मौजूद विशेष जैविक संकेतों, जैसे पसीने या त्वचा की विद्युतीय गतिविधियों, का विश्लेषण करके ग्लूकोज की मात्रा का पता लगाएगा।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने इस तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि यह सेंसर आधारित तकनीक पूरी तरह से सुरक्षित और विश्वसनीय है। इसे जल्द ही सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध कराया जाएगा।