महराजगंज। शादियों के मौसम में डीजे की तेज आवाज बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। कमजोर दिल वालों के लिए रोगियों के लिए तो यह जानलेवा है। डीजे से 120 से 130 डेसीबल तक शोर पैदा होता है जो खतरनाक ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है। जिले में डीजे का करीब एक करोड़ का करोबार होता है।
सबसे खतरनाक स्थिति तो तब हो है जब डीजे की धुन पर नाचने वाले घंटों एक ही जगह पर खड़े होकर मनोरंजन करते हैं। विवाह समारोह में डीजे बजाना फैशन हो गया है। अब त्योहार में ही नहीं, शादी-विवाह के मौके पर भी तेज आवाज में डीजे का शोर सुनाई देगा। शादी है तो कान फोड़ू डीजे बजने तय हैं। डीजे 120-150 डेसिबल बजने के साथ वाइब्रेट भी करता है। जबकि, विशेषज्ञ का मानना है कि 15 से 20 डेसिबल तक की आवाज से कान को कोई नुकसान नहीं होता है। जिले में 13 मुहूर्त में 3000 से अधिक शादियां होंगी, ऐसे में खूब डीजे बजेगा।
सिविल लाइन मोहल्ले के वरुण कुमार पटेल कहते हैं कि शादियों के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने से आसपास के मोहल्ले में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। रात में तेज आवाज के कारण लोग सो नहीं पाते हैं। शहर में करीब 30 मैरिज हॉल और लॉन हैं, जहां पर मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। कुछ जगहों पर अगल-बगल में तीन से चार मैरिज हॉल हैं, जहां लगन के समय एक साथ कार्यक्रम होते हैं। वहां तेज आवाज में देर रात डीजे बजने से लोग परेशान हो जाते हैं। डीजे संचालक अनूप यादव ने बताया कि नियम का पालन करते हुए कारोबार किया जा रहा है।
जमीन में कंपन सी महसूस होती
शहर के आजाद नगर के रामप्रताप प्रजापति कहते हैं कि डीजे के लिए पहले सामान्य जनरेटर का उपयोग किया जाता था। समय के साथ इसमें भी बदलाव हो गया है। बड़े-बड़े साउंड बाॅक्स के जरिए बजने वाले गानों की धुन भी कुछ अलग अंदाज की होती है। डीजे की तेज आवाज ऐसी होती है कि घरों की दीवारें, दीवारों पर टंगे बर्तन और जमीन में कंपन सी महसूस होती है।
-
120 डेसीबल और इससे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण खतरनाक स्तर का है। ध्वनि प्रदूषण होने की स्थिति में हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और दिल तेजी से धड़कने लगता है। इससे भय के साथ बेचैनी होने लगती है। अगर दिल के बीमारी से पहले से ग्रस्त हैं तो शादी और पार्टी में जा रहें तो डीजे बचने वाले स्थान से दूर रहें। जहां आवाज कम पहुंचे वहां रहें। उन लोगों काे और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जो अभी इस बीमारी की गिरफ्त में नहीं हैं।
डॉ. केपी सिंह, उप मुख्य चिकित्साधिकारी
तेज आवाज में डीजे बजाने की प्रथा बंद होनी चाहिए। यह तो किसी के लिए ठीक नहीं है। डीजे बजता है तो रात में नींद नहीं आती है। इसमें तो सभी को जागरूकता दिखानी चाहिए। तेज आवाज नहीं होगा तो सभी को राहत मिलेगी।
- डॉ. शांति शरण मिश्रा, मीडिया प्रभारी, सिटीजन फोरम
-
कानफोड़ू आवाज में डीजे सेहत के लिए ठीक नहीं है। यह पूरी तरह से बंद होना चाहिए। पुलिस सख्त रहेगी तो समस्या नहीं होगी। वैसे भी लोगों को स्वयं दूसरों के हित की बात को ध्यान में रखने की जरूरत है।
राकेश कुमार गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता
-
डीजे को लेकर पहले से बने नियम का पालन कराया जा रहा है। निर्धारित क्षमता में ही आवाज होनी चाहिए। शांति कमेटी की बैठकों में समय-समय पर दिशा निर्देश दिए जाते हैं।
आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक