घुघली। लंका में राक्षस और वानर सेवा की भीषण युद्ध के बाद आखिरकार भगवान राम के जयकारे से विजय पताका लहराने लगी। लेकिन जैसे ही युद्ध समाप्त होता है कि भगवान राम के भरथ के विषय में सोचने लगे। वह अयोध्या के बारे में सोच सोच कर चिंतित हो रहे थे कि रहे थे, की भाई भारत कैसा होगा। उन्होंने कहा कि अगर अयोध्या पहुंचने में देरी हुई तो अनुज चीता में प्रवेश कर जाएगा।
ये बातें राजन महाराज ने अपनी कथा के अंतिम दिन घुघली क्षेत्र के हरखा प्यास गांव में राम कथा सुनाई। उन्होंने किष्किंधा में सुग्रीव की मित्रता के साथ ही हनुमान जी के लंका दहन और लंका में रावण से हुए युद्ध का पूरा वर्णन श्रोताओं को सुनाया। जिसे सुनकर श्रोता गदगद हो गए। उन्होंने कहा कि जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ कि भगवान राम अयोध्या जाने के लिए परेशान हो गए कि अगर देरी हुई तो अयोध्या में अनर्थ हो जाएगा या सुन हनुमान जी वायु वेग से अयोध्या में पहुंचकर भारत को राम के लंका से आगमन की सूचना पहले ही पहुंचा देते हैं। विभीषण को राजा बनाने के बाद मन ही मन भरथ के विषय में सोचने लगे ।अयोध्या वापसी के बाद माता सीता गंगा जी पूजा की तथा प्रभु श्री राम निषाद राज से भी मुलाकात किए। जिससे राम की आगमन की सूचना पर पूरी अयोध्या दीप और फूल मालाओं से सजने लगती है। जैसे ही पुष्पक विमान अयोध्या के सामने आसमान में दिखाई देता है की पूरी अयोध्या जय श्री राम के नारे से गूंज उठती है हर घर में दीप उत्सव मनाया जाता है। साथ ही भगवान राम के लिए मनोहरी गीत वह सब आसपास एक दूसरे को बधाई देते नजर आते हैं। कथा के दौरान शंकर पांडेय, वरुण पांडेय, विनोद पांडेय, नीरज पांडेय, अनूप मिश्रा, प्रवीन पांडेय मौजूद रहे ।