महराजगंज। घुघली थानाक्षेत्र के एक गांव की जिंदा किशोरी को मृत बताकर उसके पिता और भाई को जेल भेजने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। आयोग ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी और वर्तमान में मैनपुरी जिले में तैनात अजय सिंह चौहान और पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. आदिदेव पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने पीड़ित पिता-पुत्र को एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने का भी आदेश दिया है।
मानवाधिकार आयोग ने 20 मई को इस मामले में फैसला दिया है। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के तहत आयोग की ओर से प्रकरण में कई बिंदुओं पर संस्तुति की गई है। पीड़ित ने 17 दिसंबर 2024 को आयोग को शिकायती पत्र भेजा था जिस पर सुनवाई हुई। पीड़ित पिता-पुत्र ने आरोप लगाया था कि घुघली थाने के तत्कालीन प्रभारी एसआई नीरज राय और प्रारंभिक विवेचक एसआई भगवान बख्श सिंह ने उन्हें अमानवीय तरीके से पीटा था।
दबाव बनाकर अज्ञात लड़की के शव की पहचान उनकी लापता बेटी के रूप में कराई। इसके साथ ही फर्जी साक्ष्यों के आधार पर बेटी की हत्या के केस में जेल भेजने के लिए झूठा आरोप-पत्र तैयार किया। आयोग ने कहा कि पीड़ितों के शिकायत पत्र के आधार पर केस दर्ज कराया जाए और जांच कराकर कार्रवाई की जाए। बेटी की हत्या के आरोप में पिता-पुत्र दो से चार माह तक जेल में रहे, जिससे उनकी सामाजिक, आर्थिक व मानसिक क्षति और उत्पीड़न हुआ है। आयोग ने यूपी प्रदेश शासन से पीड़ित पिता-पुत्र को एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने की सिफारिश की है और कहा है कि शासन इसकी वसूली आरोपी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से करने के लिए स्वतंत्र है। इस मामले में दोनों विवेचकों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है।