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Maharajganj News: बाढ़ से सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में 20 हजार की आबादी प्रभावित, छतों पर लिया आसरा

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निचलौल। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण तराई क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। पहले से बाढ़ की चपेट में आए टापू क्षेत्र के सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में करीब 20 हजार की आबादी प्रभावित है। रविवार को नारायणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद नदी किनारे बसे गांवों में भी पानी तेजी से फैलने लगा। कई गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं।
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नेपाल और स्थानीय स्तर पर बारिश के कारण सोहगीबरवा में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। गांव के अधिकांश हिस्सों में कमर से लेकर गर्दन तक पानी पहुंच गया है। गांव में बनाए गए बाढ़ आश्रय केंद्र, सचिवालय और प्राथमिक विद्यालय समेत कई ऊंचे स्थान भी पानी में डूब गए हैं। ऐसे में लोगों के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में सीएचसी सोहगीबरवा को तैयार किया गया है। मजबूत और पक्के मकानों में रहने वाले लोगों को घरों की छतों पर रहने की सलाह दी गई है जबकि कमजोर और छप्पर वाले मकानों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
नाव से पहुंच रहे रेस्क्यू दल
पानी लगातार बढ़ने के कारण एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, पीएसी और राजस्व विभाग की टीमें नावों के सहारे प्रभावित गांवों में पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही उनके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की जा रही है। रविवार को दिनभर बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। शाम तक पानी बढ़ने की रफ्तार जारी रहने से ग्रामीणों में रात को स्थिति और बिगड़ने की चिंता बनी रही। बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता पशुओं को लेकर भी है। लोग जहां अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थान तलाश रहे हैं, वहीं पशुपालकों के सामने मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती है। प्रशासन ने पशुओं को भी ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। पशु चिकित्सकों की टीम नाव के सहारे प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर आवश्यक उपचार और व्यवस्था कर रही है।
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11 गांवों में करीब 300 घर प्रभावित
नारायणी नदी के तट पर बसे गेड़हवा के बलुआ टोला, कनमिशवा के औरहवा टोला समेत आसपास के गांवों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। प्रशासन के अनुसार नदी किनारे बसे 11 गांवों में करीब 300 घर प्रभावित हुए हैं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम प्रधानों और संबंधित कर्मचारियों को भी राहत कार्य में लगाया गया है।
स्पीकअप
पूरा गांव जलमग्न हो गया है। ग्रामीणों के सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो गई है। सीएचसी में लोगों को शरण दी गई है, लेकिन सीमित जगह होने के कारण वहां भी व्यवस्था चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
-गोविंद यादव, सोहगीबरवा
बाढ़ के पानी से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। सीएचसी में आश्रय मिला है और स्वास्थ्य विभाग की टीम दवा-इलाज के साथ पहुंची है, लेकिन पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
-बैतुल्लाह,सोहगीबरवा
वर्जन
नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। सोहगीबरवा में राजस्व विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और पीएसी की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। प्रभावित लोगों को नाव के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। गांव के सभी संपर्क मार्ग जलमग्न हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम उपचार और दवा की व्यवस्था कर रही है। पशुओं के लिए भी सुरक्षित स्थान बनाया गया है। स्थिति की लगातार निगरानी कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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अवनीश त्रिपाठी,उपजिलाधिकारी
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