महराजगंज। जीएसटी घटने से जरूरी सामानों की कीमतें कम तो हो गईं, लेकिन वजन के खेल में ग्राहकों को उलझा दिया गया। लीटर को मिलीलीटर में वजन कर समान मार्केट में उतार दिया गया है। इससे कीमत तो घट गई है, लेकिन सामान का वजन भी कम हो गया है।
जानकारी के अनुसार, जीएसटी की नई दरें लागू होने के बाद भी बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय कंपनियों की गणित में ग्राहक उलझ गए हैं। रिफाइंड तेल के पैकेटों में वजन कम करके कीमतों में मामूली कटौती का खेल चल रहा है, जिससे ग्राहक खुश तो हो रहे हैं, लेकिन असल में उनकी जेब पर बोझ बढ़ रहा है।
उन्हें जोर का झटका धीरे से दिया गया है। वहीं, नारियल तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल ने आम आदमी को और परेशान कर दिया है।
शहर में फुटकर विक्रेता आकाश अग्रवाल ने बताया कि रिफाइंड पहले लीटर में आता था, अब एमएल में आ रहा है। 155 रुपये में रिफाइन 880 एमएल था। नया पैकेट 130 रुपये में 750 एमएल आ रहा है। ग्राहक दाम कम देख खुश हो जाते हैं, लेकिन वजन की जांच नहीं करते। कंपनियां पुराने स्टॉक पर भी नई दरें लागू नहीं कर रही हैं, बल्कि वजन कम करके मुनाफा बटोर रही हैं। सामान खरीदने आए ज्ञानेंद्र कुमार इस बदलाव से हैरान हैं। उन्होंने कहा की लोग सोचते हैं कि जीएसटी से दाम कम हो गए, लेकिन हकीकत में वजन कम कर दिया गया है।
अगर हिसाब लगाएं तो 37 रुपये कीमत कम होनी चाहिए थी, लेकिन सिर्फ 15 रुपये की कटौती की गई। यह उपभोक्ताओं से धोखा है। कंपनियों ने यह बदलाव इतने धीरे से किया कि किसी को पता भी नहीं चला। रिफाइंड अब बाजार में 750 एमएल के पैकेट ही ज्यादा दिख रहे हैं और पुराने एक लीटर वाले स्टॉक खत्म हो रहे हैं। वजन कम होने का खेल हर कोई समझ नहीं पा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी की नई दरों के बाद कंपनियां पुराने स्टॉक को निकालने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही हैं। छोटे शहरों में जागरूकता की कमी का फायदा उठाया जा रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि खरीदारी से पहले पैकेट का वजन, एमआरपी और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। यदि कोई अनियमितता दिखे तो शिकायत दर्ज कराएं।