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पतियों पर राज नहीं कर पाएंगी

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Maharajganj
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महराजगंज। 24 नवम्बर शनिवार को हरि प्रबोधिनी एकादशी त्योहार है। इसी दिन से हिन्दू रीति रिवाज से होने वाले शादी विवाह का मौसम शुरू होगा। लगभन में बृहस्पति ग्रह का प्रभाव होने के चलते इस साल ब्याही जाने वाली लड़कियां अपने पतियों पर हुक्म नहीं बजा पाएंगी। उन पर पतियों का राज रहेगा। हालांकि चन्द्रमा की बेहतरी से लड़कियां कला, फैशन, शिक्षा के क्षेत्र में अपना परचम फहराएंगी।
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जिले के प्रसिद्ध व्याकरण आचार्य पंण्डित दयाशंकर शुक्ल ने बताया कि 16 संस्कारों में से विवाह संस्कार का अपना महत्वपूर्ण स्थान है। सुशिक्षित संस्कार सम्पन्न कन्या के साथ शुभ मुहूर्त व लगभन में विवाह संस्कार होना धर्मनिष्ठ पुत्ररत्न प्राप्ति का परिचायक है। उन्होंने बताया कि कर्क संक्रांति से तुला राशि तक विवाह निषेध माना जाता है। जबकि मकर, कुम्भ, मेष, वृष, मिथुन, संक्रांति माघ, फाल्गुन, बैसाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ महीना शादी के लिए उत्तम है। पिछले साल दो नवम्बर 2011 को सुबह 7.15 बजे शनि ग्रह तुला राशि पर आ गया। लिहाजा कन्या, तुला और वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव हो गया है। वह ढाई साल तक विराजमान रहेगा। जिसके चलते कन्या राशि वालों को सिर, तुला वालों को हृदय और वृश्चिक राशि वालों को पैर में कष्ट हो सकता है। जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया शुरू हुई है, उनको कुछ शांति उपाय करने होंगे। जिसमें रामायण सुन्दर काण्ड, हनुमान चालीसा का पाठ, शनि स्तोत्र का पाठ और व्रत करना चाहिए। शनिवार को सुबह पीपल में जलदान, सायंकाल पीपल और शर्मावृक्ष को दीपदान, काला घोड़े की नाल या नाव के कांटी की अंगूठी शनिवार को मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए। 24 नवम्बर से शुरू हो रही शादी विवाह की लगभन 15 दिसम्बर तक रहेगी।
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