ठूठीबारी। नेपाल के पहाड़ समेत भारतीय सीमा क्षेत्र में एक सप्ताह से रुक-रुककर हो रही बारिश से क्षेत्र में बहने वाली पहाड़ी नदियां उफान पर हैं। वहीं नेपाल से निकले नाले के पानी से राजाबारी पड़ियाताल सिवान जलमग्न हो गया है। इससे किसानों के खेत में रोपी गई धान की फसल नाले के पानी में डूब गई। किसानों को धान की फसल खराब होने का डर सता रहा है।
पड़ोसी मुल्क नेपाल नवलपरासी जिले के बैरवां से गेरमी होते हुए पड़ियाताल और कुसुमा से मुडेरवां होते पड़ियाताल दोनों नाला भारतीय सीमा क्षेत्र में बहते हैं। भारतीय सीमा क्षेत्र में बहने वाले नाले का अस्तर ऊंचा होने की वजह से नाले का पानी नहीं निकल पाता है। पानी का दबाव बढ़ने पर नाला उफान पर आ जाता है। पड़ियाताल व राजाबारी गांव के सिवान में किसानों की धान के फसल को नष्ट कर देता है।
ग्राम प्रधान राजाबारी ऋषिकेश यादव, शेषमणि पटेल, भरतमणि पटेल, सत्येंद्र पटेल, रामशकल यादव, रामधनी यादव, छांगुर राजभर, घनश्याम पासवान, हीरा राजभर, सुरेश यादव, रामदास पटेल, बाबूनंदन यादव, रविनंदन, रामवृक्ष, नाथूदास पटेल, नंदमणी पटेल, संत गौतम, छत्तर गौतम आदि किसानों ने बताया की नाले की गहराई कम होने की वजह से जब पानी का दबाव बढ़ता है तो नाला उफना जाता है। राजाबारी व पड़ियाताल गांव के सिवान जलमग्न हो जाते हैं।
अगर नाले की गहराई और चौड़ाई बढ़ा दिया जाए तो आसानी से पानी निकल जाएगा और किसानों को समस्या से निजात मिल जाएगा। वही फसल डूबने से क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल इस समय वृद्धि एवं विकास के महत्वपूर्ण चरण में है। यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो फसल गल जाएगा। इस संबंध में नौतनवां तहसीलदार कर्ण सिंह ने बताया कि जलमग्न सिवान का निरीक्षण कर किसानों के हित में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।