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Maharajganj News: छह माह में 2759 महिलाओं ने कराई नसबंदी, 22 फिर से हो गई गर्भवती

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नसबंदी की विफलता पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
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एक जनवरी से लेकर 30 जून तक आयोजित शिविरों में 2759 महिलाओं ने कराई नसबंदी
रविंद्र कुमार यादव
महराजगंज। जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित नसबंदी शिविरों शामिल होने के बाद भी 22 महिलाओं के फिर से गर्भवती होने का मामला सामने आया है। छह माह में 2759 महिलाओं की नसबंदी में 22 मामले फेल हुए हैं।

वैसे तो परिवार नियोजन के उपाय कई हैं। गर्भनिरोधक गोलियों से लेकर अंतरा इंजेक्शन, कॉपर-टी से अधिक नसबंदी सुरक्षित और सफल मानी जाती है। इसी उम्मीद में महिलाएं इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाती हैं। इसमें पुरुषों का रोल नाम मात्र का होता है।
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एक जनवरी से लेकर 30 जून तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित शिविरों में 2759 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। इनमें 22 महिलाओं की नसबंदी फेल हो गई है। ऑपरेशन असफल होने के बाद ये महिलाएं दोबारा गर्भवती हो गई हैं, जिससे पीड़ित परिवारों में तनाव का माहौल है।
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सर्जिकल प्रक्रियाओं में बरती गई लापरवाही और डॉक्टरों की अनदेखी के कारण उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित परिवारों ने अब प्रशासन से मुआवजे और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि चिकित्सा विज्ञान में ट्यूबेक्टॉमी के विफल होने की एक निश्चित न्यूनतम दर होती है जो शारीरिक संरचना में बदलाव या फेलोपियन ट्यूब के दोबारा जुड़ जाने के कारण हो सकती है।
नसबंदी फेल होने पर मिलता है 60 हजार रुपये
महिला नसबंदी फेल होने पर 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति दी जाती है। छह माह में 22 नसबंदी फेल होने के मामले आ चुके हैं। नसबंदी फेल होने पर दो किस्तों में 60 हजार रुपये मिलते हैं। वहीं मृत्यु पर चार लाख रुपये दिए जाते हैं।
पुरुषों को मिलता है 3000 रुपये
महिलाओं को नसबंदी कराने पर मात्र दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जबकि पुरुषों को 3000 रुपये मिलते हैं। जबकि बिना चीरा के पुरुषों की नसबंदी होती है। दो दिन बाद ही वह काम जा सकता है। महिलाओं में यह प्रक्रिया जटिल है। स्वास्थ्य विभाग हर साल 11 से 18 जुलाई तक विश्व जनसंख्या दिवस चलाता है। इस दौरान लोगों को परिवार नियोजन के लिए जागरूक किया जाता है।
गर्भवती होने के बाद मानसिक पीड़ा झेलते हैं दंपती
नसबंदी होने के बाद भी जब महिला गर्भवती हो जाती है तो उसे मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। दंपती को अस्पताल के साथ-साथ अफसरों का भी चक्कर लगाना पड़ता है। गर्भवती होने के बाद सप्ताह ज्यादा होने के कारण महिलाओं को जान का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में महिला दर्द के साथ-साथ मानसिक पीड़ा भी झेलती है।
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यहां की गई नसबंदी स्थान नसबंदी
घुघली 225
महराजगंज 224
पनियरा 220
परतावल 179
जिला संयुक्त चिकित्सालय 128
लक्ष्मीपुर 187
रतनपुर 243
मिठौरा 362
निचलौल 347
सिसवा 261
बृजमनगंज 125
धानी 115
फरेंदा 143
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चिकित्सा विज्ञान में ट्यूबेक्टॉमी के विफल होने की एक निश्चित न्यूनतम दर होती है, जो शारीरिक संरचना में बदलाव या फेलोपियन ट्यूब के दोबारा जुड़ जाने के कारण हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को क्षतिपूर्ति भी दी जाती है। अर्बाशन भी उनका निशुल्क किया जाता है।
- डॉ. राजेश द्विवेदी, आरसीएच के नोडल अधिकारी, डिप्टी सीएमओ
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