महराजगंज/सोनौली। दुबई भेजी जा रहीं 22 महिलाओं को नेपाल माइती सेवा संस्था के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सुबह में बॉर्डर से पकड़ लिया, जबकि मानव तस्कर मौके से भाग गए। महिलाओं की उम्र 24 सो 30 वर्ष के बीच है।
पूछताछ के बाद नेपाल पुलिस के सहयोग से महिलाओं को परिजनों को सौंपा जाएगा। सभी महिलाएं नेपाल के सुदूर पहाड़ी जिलों की रहने वाली हैं। सभी विवाहित बताई जा रही हैं।
मानव तस्करी पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है। नेपाल सीमा स्थित बेलहिया में नेपाल की स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ता नेपाल से भारत जाने वाले महिलाओं और बच्चों पर नजर रख रहे थे। इस दौरान संदेह होने पर दो घंटे के दौरान एक-एक, दो-दो करके 22 महिलाओं को रोक लिया। अलग-अलग पूछताछ में सभी ने दुबई जाने की बात कही, जिसकी सूचना संस्था के लोगों ने पुलिस को दी।
नेपाल और भारत दोनों देशों में मानव तस्करी को लेकर पहले से अधिक सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नेपाल के ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा इस समस्या की जड़ है। सूत्रों की माने तो खाड़ी के कई देशों में बीते वर्षों में नेपाली लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आने के बाद नेपाल सरकार ने काम-धंधे के लिए विदेश जाने वाली लड़कियों पर उम्र संबंधी कुछ प्रतिबंध लगा रखे हैं।
इसके बाद दलालों ने भारत के रास्ते खाड़ी देशों में नेपाली महिलाओं की तस्करी शुरू कर दी। दुर्व्यवहार के कई मामले सामने आने के बाद नेपाल सरकार की जांच में यह बात सामने आई कि उक्त महिलाएं भारत के रास्ते खाड़ी देशों में पहुंची हैं। इन घटनाओं के बाद नेपाल सरकार ने नेपाली नागरिकों के भारतीय एयर सेवा के लिए नेपाली दूतावास दिल्ली स्थित एनओसी अनिवार्य कर दिया।
एक संस्था के कार्यकर्ताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ महिलाओं को पता होता है कि उन्हें बेचा जा रहा है, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी के कारण वह चुप रहती हैं। मानव तस्करी पर रोकथाम के लिए सीमा पर चौकसी बरती जाती है।
नेपाल के गांवों में जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है। भारत सरकार भी मदद कर रही है। सीमा पर नेपाल से आने वाले बच्चों और महिलाओं से पूछताछ में संदेह होने पर पुलिस और उनके परिजनों को सूचित किया जाता है, लेकिन दलालों के साथ घर से चल देती हैं। भारत में जाने के लिए नेपाली नागरिकों को आईडी के अलावा अन्य कागजात की जरूरत नहीं पड़ती है।