बुद्ध परिपथ के विकास को लेकर कार्ययोजना तैयार
भारत-नेपाल के बीच बढे़गा पर्यटन विकास
अमर उजाला ब्यूरो
नवलपरासी। नेपाल व भारत ने संयुक्त रूप से रामायण तथा बुद्ध परिपथ के विकास को लेकर कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। भारत 15 धार्मिक स्थल को रामायण परिपथ में जोड़ते हुए नेपाल के जनकपुर को भी जोड़ेगी। वहीं बुद्ध परिपथ के लिए नेपाल के लुंबनी व भारत के बोध गया को केंद्र बिंदु मान विकास कराएगा। इस बात की जानकारी संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय नेपाल के सहसचिव घनश्याम उपाध्याय ने दी।
उन्होंने बताया कि नेपाल-भारत के बीच हुए समझौते के अनुसार बुद्घ परिपथ के काम को आगे बढ़ाने की तैयारी दोनों देशों में शुरू कर दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन व विकास को दृष्टिगत रखते हुए रामायण व बुद्ध परिपथ का खाका तैयार कर लिया गया है। रामायण परिपथ में भारत के 15 धर्मस्थलों जिसमें अयोध्या, शृंगवेरपुर, चित्रकूट, बिहार के सीतामढ़ी, बक्सर व दरभंगा, मध्यप्रदेश के चित्रकूट, पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम, ओडिशा के महेंद्रगिरि, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, तेलंगना के भद्रांचलम, तमिलनाडु के रामेश्वरम, कर्नाटक के हंपी व महाराष्ट्र के नासिक व नागपुर को जोड़ते हुए नेपाल के जनकपुर धाम को जोड़ा जाएगा। वहीं बुद्ध परिपथ के लिए नेपाल रुपनदेही के लुंबनी को केंद्र बिंदु मान तिलौराकोट, रामग्राम, गोटीहवा, निग्लीहवा, नमोबुद्ध, हलेसी, बौद्धनाथ, स्वयंभू आदि क्षेत्र को समावेशित करते हुए भारत के बोध गया को केंद्र में रख सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती सहित करीब 700 किलोमीटर क्षेत्र बुद्ध परिपथ संचालन होगा।
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बाढ़ व्यवस्थापन टीम ने किया क्षेत्र भ्रमण
नवलपरासी। नेपाल के विभिन्न हिस्सों में आई बाढ़ को लेकर भारत-नेपाल की संयुक्त बाढ़ व्यवस्थापन टीम ने नेपाल के प्रभावित सात स्थलों का जायजा लिया। बाढ़ का कारण भारत द्वारा अपने क्षेत्रों में बनाए गए ऊंचे बांध सहित विभाग की लापरवाही का होना बताया गया। इस बात की जानकारी जल उत्पन्न प्रकोप व्यवस्थापन विभाग के उप महानिदेशक प्रदीप थापा ने दी। उन्होंने बताया कि सीजन के पहली बरसात में ही नेपाल के तराई क्षेत्रों में बाढ़ आ गई है। भारत-नेपाल की संयुक्त टीम ने बाढ़ प्रभावित सप्तरी, सिहारा, कमला बैरेज, महोत्तरी, रोहतक, बागमती सहित सर्लाही क्षेत्रों का भ्रमण किया गया।