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Maharajganj News: विश्व शांति का संदेश लेकर देवदह बनरसिहा कला पहुंचे थाईलैंड के 120 बौद्ध भिक्षु

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देवदह बनरसिहा कला में विश्व शांति का संदेश लेकर पैदल पहुंचे 120 थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं का भव
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विश्व शांति के लिए थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं ने निकाली पदयात्रा
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लक्ष्मीपुर। विश्व शांति और मानवता का संदेश लेकर थाईलैंड के 120 पूज्य बौद्ध भिक्षुओं का दल पद यात्रा करते हुए रविवार को लक्ष्मीपुर क्षेत्र के भगवान गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह बनरसिहा कला पहुंचा। पूज्य भिक्षु फ्रा प्रानाट के नेतृत्व में आए इस दल ने देवदह स्थित स्तूप पर पूजा-वंदना कर समस्त विश्व में शांति, करुणा और मैत्री की स्थापना के लिए प्रार्थना की। देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति में बौद्ध भिक्षुओं का जोरदार स्वागत किया।
जानकारी के मुताबिक, यह पदयात्रा बीते दिसंबर माह में कोलकाता से प्रारंभ हुई थी। वहां से भिक्षु बोधगया, कुशीनगर सहित विभिन्न पवित्र बौद्ध स्थलों से होते हुए 27 फरवरी को जनपद महराजगंज के धर्मौली परतावल पहुंचे और रात्रि विश्राम किया। इसके बाद 28 फरवरी को जनपद मुख्यालय होते हुए तथागत के अस्थि अवशेष स्थल रामग्राम चौक बाजार पहुंचे और वहीं रात्रि विश्राम किया।
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एक मार्च की सुबह 4:30 बजे रामग्राम स्तूप पर पूजा-अर्चना कर दल देवदह के लिए रवाना हुआ। सुबह 5:20 बजे भिक्षु दल माता महामाया बुद्ध विहार टेढ़ी पहुंचा, जहां भगवान बुद्ध की माता महामाया की स्मृति में निर्मित विहार में विधिवत पूजा-वंदना और पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव एवं अन्य पदाधिकारियों ने सभी भिक्षुओं का पुष्प भेंटकर स्वागत किया।
देवदह पहुंचने पर समिति की ओर से भिक्षुओं के लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की गई। इसके बाद सभी भिक्षु देवदह स्थित प्राचीन स्तूप पर पहुंचे, जहां सामूहिक रूप से त्रिशरण और पंचशील का पाठ करते हुए विश्व शांति के लिए मंगलकामना की गई। वातावरण “बुद्धं शरणं गच्छामि” के उच्चारण से गूंज उठा, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने विदेशी भिक्षुओं को देवदह और रामग्राम के ऐतिहासिक एवं पौराणिक ऐतिहासिक धर्मिक महत्व से अवगत कराया। बताया गया कि देवदह शाक्य कुल से जुड़ा वह पावन स्थल है, जहां भगवान बुद्ध का मातृकुल निवास करता था। रामग्राम स्तूप को भी बुद्ध के अस्थि अवशेषों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताया गया, जिसकी ऐतिहासिक मान्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है।
भिक्षु फ्रा प्रानाट ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है। समिति की ओर से पूज्य भिक्षु फ्रा प्रानाट को देवदह-रामग्राम का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद स भी भिक्षुओं को उनके अगले गंतव्य भगवान बुद्ध के जन्मस्थल लुंबिनी (नेपाल) के लिए विदाई दी गई।
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इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव, उपाध्यक्ष महेंद्र जायसवाल, महामंत्री लक्ष्मी चंद्र पटेल, संरक्षक शिवभुजा पांडेय, रोहित गौतम, प्रहलाद गौतम, डॉ. महावीर भारती, संतराम प्रसाद बौद्ध, आकाश राव, राम लगन गौतम, डॉ. गौरी शंकर, बबलू तिवारी, मंगल प्रसाद मौजूद रहे।
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