प्रतिबंधित संस्था को अपनी निधि से कराए जाने वाले कार्य सौंपने की संस्तुति करके रायबरेली के चार सपा विधायक फंस गए हैं। इनमें राज्यमंत्री मनोज पांडेय भी शामिल हैं।
लोकायुक्त ने चारों विधायकों को समन जारी करके अगले सप्ताह पूछताछ के लिए तलब किया है। मनोज पांडेय व रामलाल अकेला से 10 जून और देवेंद्र प्रताप सिंह व सुरेंद्र विक्रम सिंह से 11 जून को पूछताछ की जाएगी।
इस बीच जिस फर्जी शासनादेश के आधार पर प्रतिबंधित कार्यदायी संस्था को विधायक निधि के काम सौंपे गए, उसके बारे में पूछताछ के लिए लोकायुक्त ने डीआरडीए के पटल लिपिक को छह जून को तलब किया है।
यह पहला मामला है जब मौजूदा सरकार के राज्यमंत्री और विधायक को लोकायुक्त ने किसी मामले में पूछताछ का समन भेजा है।
जिस कार्यदायी संस्था को 2011 में निबंधक सहकारी समितियां की ओर से प्रतिबंधित किया जा चुका है, वही रायबरेली के ‘माननीयों’ की चहेती है और सब कुछ जानते हुए भी सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने बाकायदा नाम से उसी संस्था को काम देने की संस्तुति भेजी।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) के अवर अभियंता अरुण कुमार शुक्ला से सोमवार को हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि विधायकों ने जानबूझकर दागी संस्था को काम दिलाया जबकि नियमानुसार प्रस्ताव में कार्यदायी संस्था को लेकर संस्तुति नहीं की जा सकती।
मामले में रायबरेली के पूर्व सीडीओ डॉ. अख्तर रिजाय व डीआरडीए के परियोजना निदेशक अनिल कुमार पहले से ही लोक आयुक्त के राडार पर हैं।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि रायबरेली में विधायक निधि के कार्य आवंटन मामले में एक ही संस्था राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ को दिए जाने से संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद राज्यमंत्री मनोज पांडेय, विधायक राम लाल अकेला, देवेंद्र प्रताप सिंह व सुरेंद्र विक्रम सिंह को समन भेजकर 10-11 जून को हाजिर होने को कहा गया है। डीआरडीए के पटल लिपिक को 6 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
पटल लिपिक से कल होगी पूछताछ
अभी तक की जांच में पता चला है कि विधायक निधि के कार्य आवंटन से जुड़े अधिकारियों और बाबुओं को इसकी जानकारी थी कि राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ का पंजीकरण रद्द करके उसे प्रतिबंधित किया जा चुका है, इसके बावजूद संस्था को धड़ल्ले से कार्य आवंटित किए जाते रहे।
जांच-पड़ताल में यह भी पता चला कि 2010 में विशेष सचिव आरएन सिंह की ओर से एक शासनादेश जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ को विधायक निधि का कार्य दिया जा सकता है।
छानबीन कराने पर पता चला कि ऐसा कोई शासनादेश जारी ही नहीं हुआ। शासनादेश फाइल में कैसे पहुंचा इसका पता लगाने के लिए लोक आयुक्त ने छह जून को पटल लिपिक अशोक शुक्ला को नोटिस भेजकर तलब किया है।