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जिमन तीन: शासन की टीम ने किसानों से लिए सुझाव

Sun, 24 May 2015 12:44 AM IST
ललितपुर/ ब्यूरो
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जिमन तीन की जमीन से जुड़े  जिले के लगभग एक लाख किसानों की समस्याओं का जमीन संबंधी आकलन करने के लिए शासन द्वारा बनाई गई लीगल कमेटी के अध्यक्ष और टीम ने जिले का दौरा किया। इस दौरान किसानों ने जमीन की समस्या के निस्तारण के लिए विभिन्न सुझाव दिए।
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शनिवार को लीगल कमेटी के अध्यक्ष राजबहादुर सिंह यादव, संयोजक सदस्य भोलानाथ यादव, उप भूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्म लाल वर्मा और सुनील चौधरी ने जिले का भ्रमण किया। इस दौरान वह ग्राम खुरा और दैलवारा गए। यह कमेटी राजस्व संहिता- 2015 का निर्माण कर रही है। राजस्व संहिता में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि किसानों को कोर्ट संबंधी मामलों में अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होना पड़े, बल्कि ऐसा कोई रास्ता निकाला जाए, जिससे प्रक्रिया सरल हो जाए। इसलिए टीम आसामी पट्टे (जिमन तीन) समेत जमीन से संबंधित अन्य मामलों की पड़ताल कर रही है, साथ ही किसानों से सुझाव भी ले रही है।

जिले में जिमन तीन की समस्या बहुत पुरानी है तथा किसान इससे सीधे जुड़े हैं। दरअसल, जिमन तीन की जमीन पर किसान वर्षों से खेती करते चले आ रहे हैं, लेकिन उक्त जमीन पर उनका मालिकाना हक नहीं है। जिले में ऐसे करीब एक लाख किसान हैं, जो सीधे जिमन तीन की जमीन से जुड़े  हुए हैं। किसान इस जमीन पर मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं।   
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समाजवादी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में इस मामले को अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई थी। लेकिन, लीगल कमेटी के गठन और जिले के दौरे को लेकर किसानों को अब यह उम्मीद जाग गई है कि शायद जिमन तीन की जमीन पर उनको मालिकाना हक मिल जाएगा।

टीम ने गांवों में जाकर ग्रामीणों के अलावा लेखपालों, कानूनगो, तहसीलदार से भी बातचीत की। किसानों ने जमीन संबंधी समस्या बतायी, साथ ही यह भी सुझाव दिया कि किसानों के मुकदमों संबंधी कोर्ट की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए। किसानों ने बताया कि उनके बाबा के नाम जमीन का पट्टा था, अब नाती जोत रहा है, फिर भी मालिकाना हक नहीं है।आसामी पट्टे (जिमन तीन) की जमीन की समस्या पूरे जिले में है। किसानों ने रेवेन्यू के मामलों के निस्तारण के लिए टोल फ्री नंबर जारी करने की भी मांग की, ताकि निर्धारित समय सीमा में उनका निस्तारण किया जा सके। साथ ही जमीन संबंधी मामलों के निस्तारण के लिए गांवों में दोनों पक्षों को बैठाकर मामला सुलझाने का सुझाव दिया, ताकि किसानों को अनावश्यक रूप से कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।


सभी कलेक्टर को लिखा पत्र
ललितपुर। राजस्व संहिता- 2015 तैयार कर रही लीगल कमेटी ने प्रदेश के सभी कलेक्टर को पत्र लिखा है। इसमें आसामी पट्टा (जिमन तीन) की जमीन से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है।

टीम यहां भी जाएगी
ललितपुर। लीगल कमेटी झांसी का दौरा कर चुकी है। ललितपुर जिले के बाद यह टीम उरई, फतेहपुर और उन्नाव जाएगी। इस दौरान उक्त जिलों में किसानों से संबंधित मामले जानेगी तथा राजस्व संहिता में उसी हिसाब से फेरबदल किया जाएगा।


नहीं मिलता मुआवजा
ललितपुर। शासन की विभिन्न योजनाओं के लिए जिमन तीन की जमीन का अधिग्रहण किया जाता है, लेकिन किसानों को इसका मुआवजा नहीं मिलता है। ऐसे में जमीन अधिग्रहीत हो जाने के बाद किसान बेरोजगार हो जाता है और शासन को उक्त जमीन का मुआवजा भी नहीं देना पड़ता है। यही कारण है कि जिले में ग्यारह बांधों, बिजली परियोजना आदि के लिए आसानी से जमीन मिल गई और किसान अपना विरोध भी दर्ज नहीं करा सके।


अधिग्रहीत जमीन का कोटा निर्धारित किया जाए
ललितपुर। किसानों ने मांग करते हुए कहा कि शासन की विभिन्न परियोजनाएं जिले में संचालित हैं। इन परियोजनाओं में किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जाती है, लेकिन इसके लिए गाइड लाइन तय होनी चाहिए कि जिले से अधिकतम कितनी जमीन अधिग्रहीत की जाए, ताकि किसानों बेराजगार न हो जाएं।
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