राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा सेंटर फॉर एडवोकेसी के सहयोग से स्वास्थ्य संचार को बेहतर बनाने के लिए सोमवार को झांसी रोड बाईपास स्थित होटल में एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें मीडिया के सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं को जनपद के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने पर चर्चा की गई और उक्त योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने की रणनीति पर विचार किया गया।
स्वास्थ्य संचार के लिए आयोजित संवेदीकरण कार्यशाला में डॉ. जेएस बख्शी ने बताया कि जनपद में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एनआरसी और एसएनसीयू की शुरुआत 2007 में सबसे पहले की गई थी। जो जनपद के लिए वरदान साबित हुई है। ब्लॉक व नगर स्तर पर संचालित केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के प्रसव में आशाओं और एएनएम महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। पोषण कार्यक्रम के लिए आंगनबाड़ी कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश दुबे ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाएं हर हर व्यक्ति तक मुहैया कराना उनका पहला उद्देश्य है ताकि सेवाओं उपलब्ध होने पर उसकी जानकारी जरूरतमंदों तक पहुंच सकें और वह व्यक्ति उन सेवाओं का लाभ ले सके। उन्होंने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय में मात्र दो चिकित्सक ही कार्यरत हैं, जिला अस्पताल में भी गिने चुने चिकित्सक हैं, जिससे सबसे अधिक दिक्कत यहां आती है। यह भी बताया कि गत दिनों हुए एक इंटरव्यू में 48 चिकित्सकों के सापेक्ष मात्र छह चिकित्सकों ने ही साक्षात्कार में प्रतिभाग किया है, जिनका विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर अस्पताल में चयन किया गया है। जनपद में शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना सबसे बड़ी चुनौती बताया। जनपद में प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु अधिक होने पर भी चिंतन किया गया।
हालांकि ब्लॉक स्तर पर उन्होंने एनआरसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली पर संतोष जताया। सीएचसी पर प्रसव कराने के प्रति लोगों की सोच सकारात्मक होने और चिकित्सकों पर विश्वास को बड़ी सफलता भी माना। उन्होंने यह भी बताया कि जनपद में कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक है, लेकिन जिला अस्पताल और ब्लॉक स्तर पर एनआरसी में कुपोषित बच्चों के वार्ड में विशेष सुविधाओं के साथ 14 दिन की मातृ और शिशु की सुविधाओं की जानकारी भी दी। कार्यशाला में ग्रामीण आबादी की बेहतर स्वास्थ्य स्थिति और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और स्पष्टता के साथ टिकाऊ विकास उपायों को सुनिश्चत करने पर जोर दिया। इसके साथ ही एनएचएम कार्यक्रम के तहत मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने में संस्थागत प्रसव और नियमित टीकाकरण के माध्यम से जिला स्तर पर तय किए लक्ष्य को प्राप्त करने पर चर्चा की गई। बताया गया कि जिला में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी हुई है।
गत वर्ष यह दर जहां 75 प्रतिशत थी वह इस वर्ष 94.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जबकि दो वर्षों में पूर्ण टीकाकरण को 98.1 प्रतिशत पर बनाए रखा है। बताया कि जिला में सात एनआरसी में एक हजार 116 कुपोषित बच्चों का इलाज किया गया है। जबकि 943 उच्च जोखिम वाले गर्भधारण में से 924 यानी 98.09 प्रतिशत महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया है। यहां बताया गया कि शासन द्वारा पॉपुलेशन बेस्ड स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, जिनमें तीस साल से अधिक उम्र वाले लोगों की असंक्रामक रोगों संबंधी जाच की जाएगी। इसमें कैंसर भी शामिल है। और सारी सुविधाएं लोगों को सबसे करीबी सुविधा केंद्रों पर दी जाएगी। इसके साथ ही पैल्वेटिक केयर वार्ड भी शुरू किया जाएगा। इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रताप सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक रजिया फिरोज के अलावा सीफार आर्गेनाइजेशन से रंजना, रीना गुप्ता, डॉ. अजय भाले, डॉ. केएस सिंह यादव, डॉ. राजेश भारती, डॉ. दीपक अग्निहोत्री आदि उपस्थित रहे।