संवाद न्यूज एजेंसी
अर्जुन खिरिया। तहसील मड़ावरा के ग्राम अर्जुन खिरिया क्षेत्र में उड़द और मूंग की फसलों में पीला मोजेक रोग का प्रकोप दिखाई देने लगा है। खेतों में खड़ी फसल की पत्तियां पीली पड़ने के साथ जगह-जगह धब्बेदार नजर आ रही हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्षेत्र के किसान रमेश पस्तोर, तिलकराम दुबे ने बताया कि बारिश से पहले पानी की कमी के कारण उड़द-मूंग की फसल कमजोर हो रही थी। हाल ही में हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची तो फसल में सुधार दिखाई देने लगा था। पौधों में फूल और फलियां भी अच्छी तरह आने लगी थीं, जिससे किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब फसल में पीला मोजेक रोग दिखाई देने लगा है। इससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बड़ी संख्या में फसलों में पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं और फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते रोग की रोकथाम नहीं की गई तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है। किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों से खेतों का निरीक्षण कर रोग की स्थिति का जायजा लेने और उचित उपचार और बचाव के उपाय बताए जाने की मांग की है। बताया गया कि जनपद में कृषक प्रक्षेत्र पर उड़द की फसल में पीला मोजैक रोग दिखाई दे रहा है। यह पीला मोजेक रोग एक खतरनाक विषाणु जनित बीमारी है, जो सफेद मक्खी द्वारा फैलती है।
यह है रोग की पहचान के लक्षण
शुरूआती अवस्था में पत्तियों पर पीले और हरे रंग के चित्तीदार धब्बे या धारियां दिखाई देती हैं। समय के साथ पूरी पत्ती पीली पड़ जाती है और सिकुड़ जाती है। पौधे की बढ़वार रुक जाती है और पौधे बौने रह जाते हैं। पौधे पर बहुत कम फलियां आती हैं और दाना छोटा और कमजोर हो जाता है।
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कैप्सन-अवतार सिंह।
जैसे-तैसे उड़द, मूंग, सोयाबीन की फसलें संभल पाई थीं अब उनमें पीला मौजिक रोग लग गया जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा कृषि विभाग को इसकी रोकथाम करनी चाहिए साथ ही किसानों को रोकथाम की जानकारी देनी चाहिए ।
अवतार सिंह, किसान, महाराजपुरा।
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कैप्सन-सोबरन सिंह।
बोआई के बाद समय से पानी नहीं गिरने से फसलें बैसे ही कमजोर थीं, काफी दिनों बाद पानी गिरा तो संभल गई थीं और फूल भी ठीक आने लगा था। अब पीला मौजेक नामक रोग लगने से फसलें पीली पड़ने लगीं हैं।
-सोबरन सिंह पटेल, किसान।
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नियंत्रण के प्रभावी उपाय करें
यह रोग सफेद मक्खी से फैलता है, इसलिए मक्खियों को रोकने के लिए खेत में प्रति एकड़ 5 से 6 पीला चिपचिपा ट्रैपस लगाएं। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 फीसदी एसएल (0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) या थियामेथोक्साम 25 फीसदी डब्ल्यूजी (0.25 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें। रोग की शुरुआती अवस्था में खेत में जो पौधे पूरी तरह रोगग्रस्त (पीले) दिखें, तो उन्हें तुरंत उखाड़कर जमीन में दबा दें या कल नष्ट कर दें, ताकि रोग आगे न फैले। खेत और उसके आस-पास खरपतवारों को न पनपने दें, क्योंकि ये सफेद मक्खी का आश्रय स्थल होते हैं।
-डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र।
अल नीनो के प्रभाव से उड़द की फसल पर पीला मैजिक रोग एवं माहू इल्ली का प्रकोप
बार। बीते पंद्रह दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश और उमस के कारण जिले में उड़द की फसल पर पीला मोजेक रोग और बिल्ली माहू का दोहरा प्रकोप देखने को मिल रहा है।
कृषि विभाग एडीओ प्रिंस जैन ने बताया कि नमी-गर्मी के कारण एक से डेढ़ महीने की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित है। रोगग्रस्त पौधों के पत्ते पीले होकर सिकुड़ रहे हैं और माहू रस चूसकर पौधे कमजोर कर रहा है।
एक महीने की उड़द में पत्ते पीले होकर सिकुड़ गए हैं और माहू भी लग गया है। कृषि विभाग से सलाह लेकर इमिडाक्लोप्रिड का स्प्रे किया है। अगर 10 दिनों तक बारिश नहीं हुई तो फसल की उपज आधी से भी कम रह जाएगी।
-मनोज गोस्वामी, किसान,ग्राम धमना।
उड़द में इस बार पीला मोज़ेक बहुत तेजी से फैल रहा है। रोग वाले पौधे उखाड़कर फेंक रहा हूं और थियामेथोक्साम का छिड़काव कर रहे हैं। पानी भराव की वजह से जड़ भी गल रही है।
-परमानंद कुशवाहा, किसान, ग्राम पुलवारा।