ललितपुर। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि संयम की आराधना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना है, जिसके बंधन में बंधा मनुष्य का जीवन शांति के सागर को प्राप्त करता है। वह मंगलवार को पार्श्वनाथ जैन अटा मंदिर में धर्मसभा में बोल रहे थे।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में उच्च विचारों से परिपूर्ण होकर चलने, बोलने, खाने पीने, उठने-बैठने आदि क्रियाओं को शिष्टाचारपूर्वक करने का नाम संयम है। संयम व्यक्ति को बंधनों से मुक्त करा देता है। संयमी का दर्शन मात्र भी अमंगल को मंगल में बदल देता है। धर्म सभा का शुभारंभ श्रेष्ठीजनों ने आचार्य विद्यासागर महाराज, आचार्य अभिनंदनसागर महाराज, आचार्य विपुल सागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया। प्रारंभ में तत्वार्य सूत्र का वाचन आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ। श्रेष्ठजनों ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन किया।
अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में श्रावकों ने पर्यूषण पर्व पर प्रभु अभिषेक शांतिधारा की। उन्होंने कहा कि जीवन को व्यवस्थित करने के लिए मन, वचन, काय की क्रियाओं को संयमित करना आवश्यक है। मनुष्य इंद्रियों के वशीभूत होकर न जाने कितने काम कर अपने आपको अशांत कर रहा है, जबकि इंद्रियों पर अंकुश लगाकर अपने जीवन को आनंदित बनाया जा सकता है। धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन ने किया। जैन अटामंदिर में भी धर्मसभा हुई।
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बच्चों ने धार्मिक झांकियां सजाईं : सुगंध दशमी पर्व पर श्रावक श्राविकाओं ने उपवास रखा। अभिनंदनोदय तीर्थ, जैन अटामंदिर, आदिनाथ बड़ा मंदिर, पार्श्वनाथ नया मंदिर, आदिनाथ मंदिर गांधीनगर, चन्द्रप्रभु मंदिर डोंडाघाट, शान्तिनगर मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन में धूप विसर्जित की। इस दौरान बालक-बालिकाओं ने अपने मंडल द्वारा धार्मिक झांकियां सुसज्जित कीं, जो आकर्षण का केंद्र रहीं। आदिनाथ मंदिर गांधीनगर में भगवान शांतिनाथ विधान में श्रावकों ने अर्घ्य समर्पित किए। शाम को अभिनंदनोदय तीर्थ में पाठशाला परिवार ने भक्तिनृत्य की प्रस्तुति दी। नयामंदिर पाठशाला की ओर से क्रिकेट प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह से हिस्सा लिया।
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मोक्ष प्राप्ति के लिए संयम पहली सीढ़ी : गुरुदत्त सागर
महरौनी। मुनि गुरुदत्त सागर ने कहा कि संयम का अर्थ है अपने मन, इंद्रियों और इच्छाओं पर स्वैच्छिक रूप से नियंत्रण रखना और अनुशासित जीवन जीना। वह मंगलवार को अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि इंद्रियों के विषयों से ध्यान हटाकर आत्मा में स्थिरता लाने का पुरुषार्थ करता है। यही कारण है कि मोक्ष प्राप्ति के लिए संयम को पहली सीढ़ी माना गया है। मुनि मेघदत्त सागर ने कहा कि संयम आत्मा का सहज गुण है, जो आध्यात्मिक साधनाओं के लिए अनिवार्य है। संयम से व्यक्ति न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।
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बिना संयम के मनुष्य पशु के समान : पं. संतोष
तालबेहट। सिद्ध क्षेत्र पवागिरि सहित जैन मंदिरों में सुबह विभिन्न धार्मिक क्रियाओं के बाद सुगंध दशमी का महापर्व मनाया गया। महिलाओं ने धूप खेयी एवं एक दूसरे को सुहाग सामग्री वितरित की। वासु पूज्य मंदिर में सजल भैया ने कहा कि जीवन की वास्तविकता को जाने बिना संयम को धारण नहीं कर सकते। लेकिन, आज व्यक्ति भ्रम में जीवन यापन कर रहा है। आत्मा का कल्याण ही एक मात्र उद्देश्य होना चाहिए। पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पं. संतोष कुमार ने कहा कि बिना संयम के मनुष्य पशु के समान है। संवाद
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संयम, तप ने आचार्यश्री को बनाया धरती का भगवान : ब्रह्मचारिणी
मड़ावरा। ब्रह्मचारिणी कल्पना ने कहा कि संयम और तप ने आचार्यश्री को धरती का भगवान बनाया। उनके सानिध्य में विद्याविहार प्रांगण में तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया जा रहा है। उत्तम संयम के पावन दिवस पर प्रातःकाल की शांतिधारा का सौभाग्य अभिषेक जैन एवं मिशन जैन, अभिषेक, दिनेश बजाज को मिला। संवाद