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अमझराघाटी पर दिनों दिन बढ़ रही मजदूरों की भीड़

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हाइवे पर पैदल चलकर आ रहे मजदूर - फोटो : LALITPUR
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डोंगराखुर्द/अर्जुनखिरिया। महानगरों से वापस अपने घरों को लौट रहे मजदूरों के आने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश के बार्डर अमझरा घाटी पर एक दिन सन्नाटा रहने के बाद लगभग ढाई सौ मजदूर और आ गए हैं। उन्हें बार्डर पर पुलिस ने रोक लिया है।
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देश के विभिन्न गांवों से छह माह पहले जब मजदूर शहरों को निकले थे तो उन्हें नहीं मालूम था कि कोरोना वायरस जैसी महामारी आएगी और फिर उनकी रोजी रोटी ठप हो जाएगी। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि कड़ी धूप में उन्हें सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलना होगा। भूखे पेट, नंगे पैर, राज्यों की सीमाओं में कड़ा पहरे, वनवासी जीवन जैसे हालातों से गुजरना होगा। जहां काम किया, उस मालिक को भी इन मजदूरों से मतलब नहीं। मजदूरों को उम्मीद थी कि कहीं बस मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। महाराष्ट्र से 21 लोग किराए का ट्रक करके पांच हजार रुपये प्रति सवारी के हिसाब से जिला सिद्धार्थनगर जाना था, लेकिन अमझरा घाटी सीमा पर पुलिस के कड़े पहरे ने उन्हें निकलने नहीं दिया। छोटे-छोटे बच्चे साथ में लिए मजदूर वनवासी जीवन बिता रहे हैं। सीमा पर कभी खाना मिल गया तो कभी भूखे पेट सोना पड़ रहा है। अमझरा बार्डर पर नाराहट व्यापार मडल इनके खाने पीने की व्यवस्था कर रहा है।
महुआ बीनने वाले दकिखा रहे रास्ता उत्तर प्रदेश की सीमा अमझरा घाटी पर पुलिस प्रशासन की पहरेदारी के कारण पैदल चलने वाले मजदूर जंगल का रास्ता रख लेते हैं और वहां भटक जाते हैं। जंगल में महुआ बीनने वाले लोग भूले- भटके मजदूरों को रास्ता दिखा रहे हैं। धूप से बचने का नहीं कोई साधन आरती ने बताया कि कल सें यहां रुके हुए हैं। तेज धूप पड़ रही है। गर्म लपटें चल रही हैं, यहां छाया का कोई साधन नहीं है। छोटे बच्चों का बुरा हाल हो रहा है। अब तो यह लग रहा है कि जल्द घर पहुंच जाएं।
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करीब ढाई सौ मजदूर फिलहाल मौजूद हैं। इन्हें डिग्री कॉलेज नाराहट में रोका जा रहा है। इसके बाद बसों द्वारा मजदूरों उनके गृह जनपदों में भिजवाजा जाएगा।- अभिषेक कुमार सिंह, तहसीलदार पाली
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