ललितपुर/जाखलौन। चाहें राशन लेना हो या फिर कोई काम हो, मुंडारी के ग्रामीणों को गांव के बीच से गुजरी सौंर नदी पार करनी पड़ती है। मगर इस नदी पर कोई पुल नहीं है। ऐसे में 23 साल से यहां के ग्रामीण रस्सी के सहारे इस नदी को पार कर रहे हैं। इस नदी पर 2001 में पुल का निर्माण किया जा रहा था, जो गिर गया था। उसके बाद से यहां पुल का निर्माण नहीं हो सका।
सदर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत भारौन और बांसपुर के बीच स्थित मुंडारी गांव के बीच से निकली सौंर नदी पर वर्ष 2001 में निर्माणाधीन पुल बह गया था। इसके बाद से ही यहां पर पुल का निर्माण नहीं कराया गया। बरसात के दौरान हर बार नदी लबालब हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक इस नदी से धौर्रा से बालाबेहट, भारौन, मुंडारी, भड़या वारा, बांसपुर, चोतराघाट, डारा, पिपरोनिया, दांवर, पूरा, गिलटोरा, बरवासन धाम माता, कलशा झिर धाम समेत सीमावर्ती मध्य प्रदेश के कई गांवों के लोगों को आने-जाने के लिए ये नदी पार करनी पड़ती है। ऐसे में लोगों को रस्सी पकड़कर ही नदी पार करनी पड़ रही है। हैरत की बात तो ये है कि गांव के लोगों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक से पुल बनवाने की मांग की लेकिन नतीजा सिफर रहा। रविवार को नदी पार करने के दौरान किसान रामबाबू पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया था। शोर सुनकर आसपास के खेतों में मौजूद चरवाहों ने पथराव कर मगरमच्छ को भगाया था। इस घटना में किसान का हाथ जख्मी हो गया था, जिसका उपचार कराया गया। मगरमच्छ के नदी में होने से ग्रामीणों में दहशत है।
पीपा का पुल बनवाने की मांग
ग्रामीणों के मुताबिक साल के 12 महीनों में करीब छह महीने नदी सूखी रहने से नदी पार करने में कोई परेशानी नहीं होती है। लेकिन जब बरसात शुरू होती तो नदी में पानी आ जाने से पार करने में दिक्कत होने लगती है। उनका कहना है कि प्रशासन अस्थायी रूप से पीपे का पुल अथवा अन्य कोई व्यवस्था करा दे तो नदी पार करने में सुविधा हो जाएगी।
तेज बहाव में नाव पलटने का रहता डर
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का तेज बहाव होने के कारण नाव पलटने का डर रहता है। क्योंकि, आगे चेकडेम बना है, जिस कारण नाव तो कभी नहीं चलाई। छोटे बच्चों को नदी पार कराने के लिए मटके का सहारा लेते हैं। मटका उल्टा कर उसके ऊपर बच्चे को बिठा देते और साथ में तैरते हुए मटका को नदी पार ले जाते हैं, जिससे बच्चे बगैर भीगे नदी पार कर लेता है।
सेतु निगम को पुल बनाने के लिए छोड़ी 250 मीटर सड़क
ग्राम पंचायत बांसपुर के प्रधान राजाराम ने बताया कि नदी के दोनों ओर लोक निर्माण की सड़क है। लेकिन दोनों सड़कों के बीच 250 मीटर का भाग सेतु निगम के लिए छोड़ा गया है, जिससे वहां पर पुल बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में सेतु निगम ने पुल बनाना शुरू किया था लेकिन नदी के तेज बहाव में पुल के खंभे ही बह गए थे। जिस कारण पुल नहीं बन सका। फिर कोई यहां पुल बनाने नहीं आया।
मरीज या प्रसूता को चारपाई पर लिटाकर कराते हैं नदी पार
गांव में कोई बीमार पड़ जाए अथवा किसी महिला को प्रसव कराना है तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीण चारपाई का सहारा लेते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नदी के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं आ सकती है। इससे काफी परेशानी होती है।
ये भी जानें
निर्माणाधीन पुल बहा- वर्ष 2001
सौंर नदी की चौड़ाई -करीब 400 फिट
दो ग्राम पंचायतों की आबादी-4500
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 175
नदी से जुड़े गावों की संख्या-करीब दो दर्जन
23 वर्षों से बरसात के दौरान छह माह तक नदी में पानी अधिक होने से आवागमन में परेशानी होती है। नदी पार करने के लिए रस्सी का ही सहारा रहता है, जिसे पकड़कर निकल जाते हैं। - देवी सहरिया, ग्राम प्रधान, भारौन।
सौंर नदी पर पुल बनवाने के लिए जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिए लेकिन कुछ नहीं हुआ। ग्रामीण रस्सी के सहारे नदी पार कर रहे हैं। अब मगरमच्छ आने से उसका भी डर सता रहा है। - कृष्णा बाई, ग्राम प्रधान बांसपुर
23 सालों से पुल की आस लगी है लेकिन पुल बनना तो दूर कोई देखने तक नहीं आया। 70 साल की उम्र में नदी पार करने में काफी परेशानी होती है। अधिकारी नदी पर पुल बनवा दें तो काफी राहत हो जाएगी। - भैय्यालाल, ग्रामीण
बरसात के दिनों में नदी पार करना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में बच्चे स्कूल जाते हैं तो चिंता लगी रहती है कि वापस कैसे आएंगे। वोट मांगने आने वाले नेताओं को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। - भगत सिंह, ग्रामीण
सौंर नदी पर पुल बनवाने के लिए एसडीएम से रिपोर्ट लेकर कार्यदायी संस्था को कार्ययोजना बनाने के संबंध में पत्र लिखा जाएगा। - अंकुर श्रीवास्तव, प्रभारी डीएम/एडीएम वित्त एवं राजस्व।