सिलावन (ललितपुर)। सूखे की मार भले ही किसानों पर पड़ रही हो, पर जिनके हाथों में सूखे की मार को कम करने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन की कमान थी। उनके लिए यह योजनाएं कुबेर का खजाना साबित हो रही हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में मनमानी की गई। स्थिति यह है कि ब्लाक महरौनी में बहुत से किसानों के कुएं अधूरे छोड़ दिए गए और उनको पूरा दिखाकर पैसा निकाल लिया गया। ऐसे में इतना तो तय है कि लाभार्थी को लाभ मिला हो अथवा नहीं, लेकिन योजना का संचालन करने वालों को लाभ ही लाभ हुआ है।
1.37 लाख खर्च, कुआं आज भी अधूरा
वित्त वर्ष 2014-15 में ब्लाक महरौनी के ग्राम कुसमाड़ निवासी किसान रामचरन पुत्र धमुवा का मनरेगा के तहत कुआं निर्माण योजना में नाम चयनित हुआ। उसके खेत पर कुआं का निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। रामचरन खुश था कि कम से कम उसके खेत को पानी मिलेगा। लेकिन, 1.37 लाख रुपये की धन राशि खर्च होने के बाद भी कुआं आज भी अधूरा है। दिलचस्प बात तो यह है कि ग्राम विकास अधिकारी ने कुआं के निर्माण की कार्य पूर्ति की रिपोर्ट तो लगा दी, लेकिन मौके पर कुआं गायब है। बाद में उस कुएं को नष्ट होना बता दिया गया। इसका खुलासा सोशल ऑडिट में भी हो चुका है। अमर उजाला ने उक्त मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे संज्ञान में लेते हुए उपायुक्त (श्रम व रोजगार) नरेंद्र देव द्विवेदी ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के सहायक अभियंता भागीरथ चतुर्वेदी को जांच कर फोटोग्राफ समेत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। लेकिन, जांच हुई और मामले में लीपापोती कर दी गई।
पिता के बाद बेटे को है कुंआ बनने का इंतजार
ब्लाक महरौनी अंतर्गत ग्राम पंचायत चौकी का मजरा दिगवार गांव निवासी गुलझारी पुत्र लटौरे का चयन वर्ष 2009-10 में मनरेगा के तहत सिंचाई कूप निर्माण के लिए हुआ था। वर्क आईडी (3140005013/ डब्ल्यूएच/ 193) से कुआं की खुदाई का कार्य शुरू किया गया। कुछ फुट की खुदाई के बाद काम रोक दिया गया। काम शुरू कराने के लिए गुलझारी अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। इस बीच उसकी मृत्यु हो गई। उसके बाद उसका पुत्र जानकी अहिरवार अधिकारियों से कूप निर्माण कराने की गुहार लगाते-लगाते थक चुका है। उसका कहना है कि जो काम तीन महीने में पूरा होना था, वह इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा है।
बिना मुडेर का कुआं हुआ बेकार
ग्राम दिगवार निवासी किसान लल्लू पुत्र दुर्गा प्रसाद के खेत पर बुंदेलखंड पैकेज से कुएं का निर्माण कराया गया। खुदाई उपरांत कुएं की बंधाई का कार्य भी कर दिया गया, लेकिन ठेकेदार ने रुपये बचाने के चक्कर में कुएं की मुडेर नहीं बनवाई, जिसके कारण पानी के साथ-साथ आसपास की मिट्टी उस कुएं चली गई और कुंआ बेकार हो गया। अब वह चक्कर लगा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
सिर्फ 25 फुट खुदाई और कार्य पूर्ति हो गई
ग्राम पंचायत चौकी में कोमल पुत्र कड़ोरे और दुर्जन पुत्र सूके के मनरेगा योजना के तहत सिंचाई कुएं बनवाए गए। कुओं की खुदाई महज 25 फुट तक ही की गई, इसके बाद कुएं जस की तस स्थिति में हैं, जबकि एमआईएस फीडिंग में इन्हें पूर्ण होना बताकर धनराशि निकाल ली गई। ऐया ही ग्राम पंचायत कुम्हैड़ी में प्रेम पुत्र थोवन के साथ हुआ। कुएं की खुदाई मात्र 13 फुट की गई, जबकि कार्य पूर्ण होना बताकर धनराशि निकाल ली गई। यह स्थिति एक-दो किसानों के साथ नहीं हुई, बल्कि कई किसान ऐसे हैं जो चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
जांच रिपोर्ट के बाद आरोपियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर पूरे मामले को डीएम के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद वह जो आदेश देंगे, उसी के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
- नरेंद्र देव द्विवेदी
उपायुक्त (श्रम व रोजगार)