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पानी संरक्षण के प्रयास बेकार, भूजल स्तर गिरा

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handpump - फोटो : demo
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ललितपुर। भूगर्भ जल स्तर में आ रही गिरावट को रोकने के लिए करोड़ों रुपये वर्षा जल संचयन पर खर्च हो चुके हैं। लेकिन, जनपद को इस समस्या से अब तक छुटकारा नहीं मिल सका है। गर्मी का मौसम आते ही एक बार फिर भूगर्भ जल स्तर में गिरावट दिखाई देने लगी है। विभागीय अफसर इसके लिए पानी के अत्यधिक दोहन को जिम्मेदार मानते हैं।
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बुंदेलखंड में पेयजल की समस्या किसी से छिपी नहीं है। जनपद भी इस समस्या से अछूता नहीं है। यहां भूगर्भ जल स्तर में सुधार लाने के लिए तमाम वर्षा जल संचयन की योजनाएं चलाई गई। जिला बनने से अब तक लघु सिंचाई विभाग विभिन्न क्षेत्रों में नदी और नालों पर छह सौ से ज्यादा चेकडैम का निर्माण करा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी चेकडैमों का निर्माण हुआ। तीन तालाब व आठ सौ पैतीस कुओं का निर्माण प्रस्तावित है। वहीं, मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है। भूमि संरक्षण विभाग विभिन्न परियोजना के अंतर्गत खेत- तालाबों का निर्माण करा रहा है। वन विभाग और जिला पंचायत भी वर्षा जल संचयन के लिए काम कर रहे हैं। इसके बाद भी क्षेत्र के भूगर्भ जल स्तर में होने वाली गिरावट की समस्या दूर नहीं हो सकी है।
इस बार की बरसात से जिले के सभी बांध लबालब हो गए थे। अब, जब अप्रैल की शुरुआत हुई तो एक बार फिर भूगर्भ जल ने नीचे की ओर सरकना आरंभ कर दिया है। इससे कई क्षेत्रों में या तो हैंडपंप ड्राई हो गए हैं या फिर हैंडपंप खराब होने लगे हैं। कइयों में और पाइप जोड़ने की मांग उठने लगी है। इससे स्पष्ट है कि वर्षा जल संचयन का सीधा लाभ नजर नहीं आ रहा है। पहले शहर के भूगर्भ जल स्तर को स्थिर रखने में सुम्मेरा तालाब मददगार होता था। मौजूदा समय में इसे खाली कराया जा रहा है। नगर पालिका इसके सुंदरीकरण का काम कराने की तैयारी में है। तालाब खाली होने से शहर में भूगर्भ जल के और नीचे खिसकने की समस्या देखी जा रही है। कई मोहल्लों में लोग अपने निजी बोर में पानी कम होने की शिकायत करने लगे हैं। विभागीय अफसर इस समस्या के लिए पानी के अत्यधिक दोहन को जिम्मेदार मानते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस बार गेहूं की बुवाई दो लाख हैक्टेयर क्षेत्र में हुई, इसमें सिंचाई के रूप में पानी का ज्यादा इस्तेमाल हुआ। ये भी एक कारण भूगर्भ जल स्तर में गिरावट को माना जा सकता है।
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उधर, जिला पंचायत ने इस समस्या से निपटने के लिए ग्राम पंचायतों को सतर्क कर दिया है। इस समय ग्राम पंचायतों केे पास 101 टैंकर पेयजल जलापूर्ति के लिए उपलब्ध हैं। वहीं, हैंडपंपों की मरम्मत के लिए पैसा है। भूगर्भ जल स्तर में आ रही गिरावट से कई गांवों में तालाब और पोखरों में पानी सूख गया है, ऐसे में जानवरों के लिए पीने के पानी की समस्या खड़ी हो सकती है। इन पर ग्राम पंचायतों को ध्यान देना होगा।  

गर्मी के मौसम में पानी भाप बनकर उड़ता है। इससे तालाब और पोखरों में पानी कम होने लगता है। जब तक लोग पानी की कीमत को नहीं समझेंगे, तब तक पेयजल की समस्या बनी रहेगी।
- ललित कौशिक

कैप्सन- गोकुल
सरकारें बारिश के पानी को रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। कई जगहों पर काम दिखाई देता है। हम- आपको पानी को बचाने के लिए सजग होना होगा। देेखते हैं कि पढ़े- लिखे व्यक्ति ही पानी को फिजूूल में बर्बाद करते हैं, जबकि उन्हें लोगों में आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
- गोकुल

गर्मी के मौसम में भूगर्भ जल स्तर में गिरावट आने लगती है। वर्तमान में जल स्तर में गिरावट देखी जा रही है। ग्रमीण क्षेत्र में लगे कई हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने की बात आ रही है। हालांकि, जल निगम हैंडपंप मरम्मत व रीबोर का काम नहीं कर रहा है। इस कार्य का जिम्मा ग्राम पंचायतों के पास है।
- सुलेमान खान, अधिशासी अभियंता
जल निगम

-----गर्मी में पेयजल की समस्या के मद्देनजर प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने बैंक खाते में तीन लाख रुपये रखने के निर्देश दिए गए हैं। वह इस राशि से हैंडपंपों की मरम्मत व टैंकर चलवाने का काम करेंगे।  
- श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी

----जिले में पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे भूगर्भ जल स्तर में गिरावट की समस्या हल नहीं हो पा रही है। इससे निपटने के लिए कोई कारगर उपाय करने की जरूरत है।
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- मृत्युंजय कुमार, अधिशासी अभियंता
लघु सिंचाई विभाग
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