फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lalitpur News: कहीं चोरी न हो जाए जमडार बांध से मिलने वाला पानी... एमपी पुलिस करेगी निगरानी

Fri, 31 May 2024 04:31 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

ललितपुर। ललितपुर के जमडार बांध से टीकमगढ़ तक पानी एमपी पुलिस की निगरानी में पहुंचेगा। पानी चोरी होने की आशंका को लेकर टीकमगढ़ नगर पालिका प्रशासन ने जमडार नदी के किनारे मध्य प्रदेश पुलिस की तैनाती करने की तैयारी की है। बृहस्पतिवार को टीकमगढ़ नगर पालिका प्रशासन और ललितपुर के सिंचाई विभाग के अफसरों ने जमडार बांध का निरीक्षण किया। इस दौरान पानी की सुरक्षा को लेकर मंथन किया गया। अफसरों का कहना है कि आठ साल पहले वर्ष 2016 में भी पेयजल संकट होने पर जामनी बांध से टीकमगढ़ तक पानी पुलिस की देखरेख में पहुंचाया गया था।
मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ शहर को पेयजल की आपूर्ति ललितपुर के जामनी बांध से की जाती है। जामनी बांध से पानी टीकमगढ़ के कुंडेश्वर के पास वरीघाट तक पहुंचता है। इस साल भीषण गर्मी के चलते वरीघाट में जलस्तर कम हो गया है। इससे टीकमगढ़ शहर में पेयजल संकट खड़ा हो गया है। संकट दूर करने के लिए टीकमगढ़ कलेक्टर ने ललितपुर के डीएम को पत्र लिखकर जामनी बांध से एक एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी मांगा है। वहीं ललितपुर जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग ने जामनी बांध में जलस्तर कम होने के चलते जमडार बांध से पानी देने की बात कही है। मगर जमडार बांध से मिलने वाले पानी की सुरक्षा को लेकर टीकमगढ़ नगर पालिका प्रशासन के अफसर चिंतित हैं।
विज्ञापन

बताया जाता है कि साल 2016 में भी टीकमगढ़ में पेयजल संकट होने पर ललितपुर से पानी मांगा गया था। तब जामनी बांध के गेट खोलकर जामनी नदी के जरिये पानी वरीघाट तक पहुंचाया गया था। लेकिन जब जामनी नदी में पानी छोड़ा गया तो ग्रामीण क्षेत्रों के किसान नदी में इंजन पंप रखकर पानी का उपयोग करने लगे थे। इस पर टीकमगढ़ प्रशासन ने जामनी नदी के किनारे पुलिस फोर्स तैनात करके टीकमगढ़ तक पानी पहुंचाया था। इस बार भी जमडार बांध से मिलने वाले एक एमसीएम पानी की चोरी रोकने के लिए टीकमगढ़ पालिका प्रशासन ने जमडार नदी के किनारे पुलिस फोर्स लगाने की तैयारी की है। इसे लेकर योजना बनाई जा रही है। टीकमगढ़ शहर पेयजल प्रभारी अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि जमडार बांध से टीकमगढ़ के लिए छोड़े जाने वाले पानी के रास्ते में पानी की चोरी न हो सके। इसके लिए कलेक्टर के निर्देश पर एमपी क्षेत्र में खिरिया व अस्तौन चौकी पर पुलिस अलर्ट रहेगी और नदी क्षेत्र की निगरानी करेगी। इतना ही नहीं क्षेत्र के सरपंच व पटवारियों को भी निर्देशित किया गया है।
-

जमडार बांध में देखी पानी की उपलब्धता
सिंचाई विभाग और टीकमगढ़ नगर पालिका प्रशासन के अफसरों ने बृहस्पतिवार को जमडार बांध में पानी की उपलब्धता देखी। यहां पानी की उपलब्धता ठीक-ठाक मिली। उम्मीद जताई जा रही है कि बांध से जमडार नदी के माध्यम से टीकमगढ़ तक पानी पहुंचाने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी। इस दौरान पानी की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा की गई। इस मौके पर सिंचाई निर्माण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता इं. भागीरथ बरुआ, धीरज, रमाकांत और टीकमगढ़ नगर पालिका परिषद की सीएमओ गीता मांझी, इंजीनियर जेवा मंसूरी, दीपेंद्र कुशवाहा और टीकमगढ़ शहर पेयजल प्रभारी अनिल श्रीवास्तव मौजूद रहे।

वर्जन
टीकमगढ़ में पेयजल समस्या होने को लेकर टीकमगढ़ कलेक्टर ने जमडार बांध से पानी छोड़े जाने की मांग की थी। इस संबंध में सिंचाई निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता को जमडार बांध में पानी की उपलब्धता देखने और उपयुक्त होने पर एमपी क्षेत्र को पानी देने को कहा गया है।
- अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी, ललितपुर
-

टीकमगढ़ नगर पालिका की टीम के साथ जमडार बांध का निरीक्षण किया। टीकमगढ़ को पानी देने के लिए मुख्य अभियंता को पत्र भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद टीकमगढ़ को पानी भेजा जाएगा।
विज्ञापन

इं. भागीरथ बरुआ, अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड प्रथम
-
एमपी पर बकाया हैं तीन करोड़
जामनी बांध के निर्माण के बाद यूपी-एमपी के बीच वर्ष 1974 में समझौता हुआ था। इसमें जामनी बांध का 17 फीसदी पानी एमपी के लिए आरक्षित किया गया था। इसके एवज में मध्य प्रदेश प्रशासन को निर्धारित राशि उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग को देनी थी। समझौते के तहत जामनी बांध से हर साल मध्यप्रदेश पानी तो लेता रहा, लेकिन उत्तर प्रदेश को कोई भुगतान नहीं किया। मध्यप्रदेश पर जामनी बांध से लिए गए पानी के करीब तीन करोड़ रुपये बकाया हैं। इसे लेकर यूपी सिंचाई विभाग ने जब एमपी से पत्राचार किया तो मामला केंद्रीय जल आयोग पहुंचा। जल आयोग में एमपी शासन ने यह तर्क रखा कि मध्य प्रदेश से निकली हुई नदियों पर उत्तर प्रदेश ने बांध बनाए हैं। इसलिए बांधों से उन्हें पानी नि:शुल्क दिया जाए। मामला अभी केंद्रीय जल आयोग में लंबित है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें