अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। चुनाव में संगठन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहती है, लेकिन भाजपा को छोड़ अन्य दलों के संगठन सक्रिय नजर नहीं आए। कांग्रेस ने चुनाव के समय ही जिलाध्यक्ष बदल दिया, लेकिन कार्यकारिणी आज तक गठित नहीं हो सकी। सहयोगी पार्टियों के संगठन की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। भाजपा के जीतने की वजह मजबूत संगठन ही माना जा रहा है। विगत छह माह से लगातार संगठन स्तर से बूथ कमेटियों को सक्रिय करते हुए उनके प्रशिक्षण चल रहे थे।
वर्ष 1984 व 1999 में कांग्रेस से सुजान सिंह बुंदेला ने विजय हासिल की थी। वर्ष 2009 में कांग्रेस से प्रदीप जैन आदित्य 55.1 फीसदी वोट पाकर विजयी हुए थे। इसके बाद से संगठन स्तर पर कोई काम नहीं किया गया उसी का नतीजा अब सामने आया। निवर्तमान अध्यक्ष बलवीर सिंह राजपूत ने संगठन को संभाला, लेकिन पार्टी के तेवर नजर नहीं आए। चुनाव से दो माह पहले कांग्रेस की कमान राजेश कुमार रजक को सौंपी गई, लेकिन समय कम होने पर कमेटी का भी गठन नहीं हो सका। पार्टी के फ्रंटल संगठन का भी बुरा हाल है। समाजवादी पार्टी में भी वह तेवर नहीं दिखे, जिसके लिए पार्टी जानी जाती है। बूथ स्तर पर इन पार्टियों ने कोई काम नहीं किया, जिस कारण इंडिया गठबंधन प्रत्याशी प्रदीप जैन आदित्य को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।
-भाजपा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ता ने अपने वोट पहले डलवाए
मतदान के दिन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ता अपने वोट घरों से निकलवा कर डलवाते रहे, जबकि और लोग उस स्तर पर काम नहीं कर सके। पार्टी जिलाध्यक्ष राज कुमार जैन व नगर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल के निर्देशन में संगठन ने बेहतर काम कर अपने प्रत्याशी को रिकार्ड मतों से जिता दिया।
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चुनाव से दो माह पहले संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन बूथ स्तर पर संगठन का गठन नहीं हो सका। चुनाव प्रबंधन गड़बड़ रहने के कारण भी उस स्तर से काम नहीं कर सके, जो करना चाहिए था। हार की समीक्षा के लिए दो दिन बाद बैठक की जाएगी।-राजेश कुमार रजक, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
चुनाव में मिली सफलता भाजपा के हर उस कार्यकर्ता की जीत है, जिसने रात दिन मेहनत कर बूथ स्तर पर काम किया। पार्टी नेतृत्व के निर्देशन में हम सभी ने काम कर चुनाव में सफलता पाई है।-राजकुमार जैन, जिलाध्यक्ष भाजपा