ललितपुर। यूक्रेन में फंसा ललितपुर का उत्कर्ष चौबे रविवार को आखिरकार एक सप्ताह की जद्दोजहद के बाद अपने घर परिजनों के बीच पहुंच ही गया। उत्कर्ष के घर पहुंचने पर उसने माता-पिता का आशीर्वाद लिया। माता-पिता ने आरती उसकी उतारकर मालाएं पहनाकर स्वागत भी किया तो मां ने बलाएं लेकर नजर भी उतारी। उत्कर्ष ने बताया कि यूक्रेन में सब डेर हुए थे, लेकिन जब उसे हंगरी के लिए बस मिली तो उसे वहां से सुरक्षित निकलने की पूरी उम्मीद जाग गई। उसने कहा कि यूक्रेन के सूमी में अब भी बहुत से भारतीय फंसे हैं, सरकार उनको मदद पहुंचाए।
शहर के मोहल्ला चौबयाना निवासी भाजपा नेता डॉ. दीपक चौबे का बेटा उत्कर्ष चौबे यूक्रेन में पांच वर्ष से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। उसकी डिग्री होने में मात्र छह माह ही बचे थे कि रूस और यूक्रेन में युद्घ छिड़ गया जिससे यूक्रेन में भारतीय नागरिक और पढ़ाई करने गए हजारों भारतीय विद्यार्थी फंस गए। रविवार को उत्कर्ष चौबे सकुशल घर लौट आया। घर पहुंचने पर माता पिता ने उसे गले लगा लिया और उसे फूल मालाएं पहनाकर आरती उतारकर उसका स्वागत किया। फिर उसे घर के अंदर ले जाकर घर के देवी देवताओं के सामने मत्था टेका। उत्कर्ष चौबे ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि इस संकट में सरकार की ओर से फ्लाइट की व्यवस्था थी, लेकिन कीव एयरपोर्ट बमबारी के चलते बंद हो गया था, जिससे वह टिकट बुक होने के बाद भी नहीं लौट सका था। यूक्रेन के दूतावास ने कह दिया था कि बार्डर तक पहुंच जाओ, लेकिन वहां कोई ट्रांस्पोटेशन की व्यवस्था नहीं थी और एटीएम ने भी काम करना बंद कर दिया था, जिससे पैसे भी नहीं थे, जिस पर उसने वहां के अपने एक दोस्त से तीन हजार ग्रेवेन लिए थे। उसके पास खाना, पानी भी नहीं बचा था। लाइट बंद कर दी गई, गैस नहीं थी, हीटर भी नहीं चल रहे थे तो ऐसे में बर्फ पिघलकर पानी भी नहीं बना पा रहे थे।
उसे सबसे ज्यादा डर उस समय लगा जब यूक्रेन की लोकल मीडिया में वहां के बारे में तरह की पोस्ट आने लगी थी कि अब कभी भी वहां भी हमला हो सकता है। इसके बाद एक दोस्त ने हंगरी जाने के लिए बस की बात कर ली और एक बस के लिए दो लाख ग्रेवेन (साढ़े पांच लाख रुपये) की बात हुई। बस पकड़कर वह हंगरी केे बुडापेस्ट पहुंच गया तो अब उसे वतन लौटने का पूरा विश्वास हो गया, लेकिन फिर भी मन में आशंकाएं लगी रहीं, हालांकि वह वहां पूरी तरह सुरक्षित था और खाने, पीने और ठहरने के उचित इंतजाम किए गए थे। फ्लाइट पकड़कर शनिवार को जब वह दिल्ली पहुंच गया तब उसने अपने को पूर्ण सुरक्षित महसूस किया। उसने कहा कि भारत सरकार ने उसे वतन लाने में मदद की तो उत्तर प्रदेश सरकार ने उसके लिए घर तक पहुंचाने में पूरा सहयोग किया।
बेटा वीडियो कॉल करके सांत्वना देता था
उत्कर्ष की मां ने बताया कि उनका बेटा यूक्रेन से वीडियो कॉल पर बात करके खुद के पूरी तरह ठीक होने की बात कर सांत्वना देता था, लेकिन जब न्यूज देखतीं और वहां की बमबारी की तस्वीरें आती तो उनका मन बेटे की सुरक्षा के लिए व्याकुल हो जाता था।
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-उत्कर्ष के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दिल्ली से घर पहुंचने के लिए प्राइवेट वाहन उपलब्ध कराया गया था, लेकिन शनिवार की रात को वह उरई में अपने नाना भगवानदास शुक्ला के घर ठहर गया था, जहां से वह रविवार की दोपहर में करीब तीन बजे सुरक्षित ललितपुर पहुंचकर घर पहुंच गया है। उससे और उसके परिजनों से मिलकर उसका हालचाल जाना। -आरती सिंह, आपदा विशेष कलक्ट्रेट।
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उत्कर्ष से प्रशासन लगातार संपर्क में रहा और दिल्ली से घर पहुंचने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से वाहन उपलब्ध कराया गया। रविवार को वह घर पहुंच गया है। श्याममणी त्रिपाठी, तहसीलदार सदर।