ोवोत्थान एकादशी की पूजा के लिए बाजार में सजी फूलों व माला की दुकानें
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ललितपुर। देवोत्थानी एकादशी पर घरों में पारंगत तरीके से पूजा- अर्चना की गई। इस दौरान पटाखे फोड़े गए व आतिशबाजी छोड़ी गई। वहीं, प्रतीकात्मक तरीके से तुलसी विवाह किया गया।
देवोत्थानी एकादशी को मनाने के लिए सुबह से ही गन्ना की दुकानें सज गई थी। दिन भर लोगों ने खरीदारी की। शाम को लोगों ने घरों में गन्ने का तंबू सजाकर पूजा - अर्चना की। देवोत्थानी एकादशी को तुलसी एकादशी भी कहा जाता है। देवोत्थानी एकादशी को ही भगवान शालिग्राम से तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है।
मान्यता है कि श्री शालिग्राम जी से तुलसी विवाह करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तुलसी के पौधे को आंगन में स्थापित करने की वैदिक काल से परंपरा चली आ रही है। वैज्ञानिक मान्यता है कि तुलसी के पौधे में प्राणवायु प्रदायक ऊर्जा रहती है। शालिग्राम का विग्रह जिस घर में स्थापित होता है, वहां भगवती लक्ष्मी निवास करती हैं। डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को घर के आंगन में तुलसी का पौधा स्थापित कर प्रतिदिन दीप दान करना चाहिए तथा तुलसी दल से भगवान का पूजन करना चाहिए।
देवोत्थान एकादशी पर्व पर गन्ना खरीदते लोग- फोटो : LALITPUR